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बाड़मेर में 7 साल की मासूम से दरिंदगी के मामले में 107 दिन में इंसाफ, दोषी को अंतिम सांस तक उम्रकैद

राजस्थान के बाड़मेर में सात साल की मासूम के साथ दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो अदालत ने महज 107 दिनों में फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी मगसिंह को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और 1.75 लाख रुपये जुर्माने की सजा दी। पीड़िता को 7 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए गए। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अजिताभ आचार्य भावुक हो गए। उन्होंने पीड़िता की मां से हाथ जोड़कर समाज और प्रशासन की ओर से संवेदना व्यक्त की। अदालत ने प्रशासन को बच्चियों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और पुलिस गश्त बढ़ाने के निर्देश भी दिए।

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मुख्य बातें

  • बाड़मेर में मासूम को 107 दिन में इंसाफ, दोषी को अंतिम सांस तक उम्रकैद
  • 20 गवाह और 62 साक्ष्य बने आधार, सात साल की बच्ची से दरिंदगी पर कठोर सजा
  • बच्चियों की सुरक्षा पर अदालत सख्त, बाड़मेर में दोषी को उम्रकैद

BARMER, 04 NOV. 2026:

107 दिन में आया फैसला, दोषी को उम्रकैद

बाड़मेर शहर में सात साल की बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के मामले में विशिष्ट पॉक्सो अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी मगसिंह को दोषी मानते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 1.75 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने पीड़िता को 7 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए। मामले में पुलिस ने तेजी से अनुसंधान पूरा किया था। इसके बाद करीब तीन महीने चली सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना पक्ष रखा।

फैसला सुनाते समय भावुक हुए न्यायाधीश

फैसले के दौरान विशिष्ट न्यायाधीश अजिताभ आचार्य भावुक हो गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत का फैसला भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर दिया गया है। इसके बाद उन्होंने पीड़िता की मां के सामने हाथ जोड़कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में ही नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन की ओर से भी वह परिवार की पीड़ा को महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चियों को अपने घर के बाहर भी सुरक्षित माहौल मिलना चाहिए। इस टिप्पणी ने अदालत में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।

झाड़ियों में ले जाकर बच्ची के साथ की थी दरिंदगी

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 19 जुलाई 2026 की दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच हुई थी। सात साल की बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी मगसिंह उसे बहला-फुसलाकर बबूल की झाड़ियों की ओर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद बच्ची इतनी सहम गई थी कि वह अपनी आपबीती ठीक से बता भी नहीं पा रही थी। उसने रोते हुए परिजनों को अपने साथ गलत काम होने की बात बताई। इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी और मामला दर्ज कराया गया।

दो घंटे में गिरफ्तारी, 14 दिन में पूरी की जांच

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। बाड़मेर एसपी चूनाराम जाट के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने घटना के करीब दो घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद जांच टीम ने साक्ष्य जुटाने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया। पुलिस ने लगभग 14 दिनों में अनुसंधान पूरा कर अदालत में चालान पेश कर दिया। इस कार्रवाई में तत्कालीन महिला थानाधिकारी देवीचंद ढाका, सीआई सरिता विश्नोई और अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका रही।

20 गवाह और 62 साक्ष्यों से साबित हुआ अपराध

अदालत में अभियोजन पक्ष ने कुल 20 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। इसके साथ ही 44 दस्तावेजी साक्ष्य और 18 अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इस तरह कुल 62 साक्ष्यों के आधार पर अदालत के सामने मामला रखा गया। विशिष्ट लोक अभियोजक दामोदर चौधरी और अधिवक्ता राजेश विश्नोई ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की। केस ऑफिसर सीआई सरिता विश्नोई और कांस्टेबल हिंगलाजदान ने अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। करीब तीन महीने चली सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।

कलेक्टर और एसपी को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

अदालत ने सजा सुनाने के साथ ही जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को बालिका एवं महिला सुरक्षा के लिए विशेष निर्देश दिए। बाड़मेर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता बताई गई। स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय संवेदनशील रास्तों पर पुलिस गश्त सुनिश्चित करने को कहा गया। अदालत ने सुरक्षा व्यवस्था को केवल सरकारी कागजों तक सीमित न रखने पर जोर दिया। निर्देशों का उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।

पुलिस और अभियोजन टीम की भूमिका रही अहम

इस मामले में पुलिस की विशेष टीम ने तेजी से कार्रवाई की। एसपी चूनाराम जाट के निर्देश पर एएसपी नितेश आर्य, तत्कालीन महिला थानाधिकारी देवीचंद ढाका, सीआई सरिता विश्नोई, महिला सेल एएसआई हरदानराम, हर्षाराम, बबरी और कांस्टेबल हिंगलाजदान तथा विक्रमसिंह ने जांच में भूमिका निभाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाहों और दस्तावेजों के जरिए घटनाक्रम प्रस्तुत किया। त्वरित जांच और सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी को कठोर सजा सुनाई। इस फैसले के साथ ही अदालत ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी भी रेखांकित की।

पुलिस का पक्ष

पुलिस की विशेष टीम ने तेजी से कार्रवाई की।

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