राजस्थान: 78 साल की भीखी देवी 7वीं बार निर्विरोध सरपंच चुनी गईं, वीरेंद्र नगर में फिर सर्वसम्मति
राजस्थान के बाड़मेर जिले की बायतु पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत में 78 वर्षीय भीखी देवी लगातार सातवीं बार निर्विरोध सरपंच चुनी गई हैं। उनके साथ पंचायत के सभी सात वार्ड पंच भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। भीखी देवी पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी की पत्नी हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 1994-95 से गांव में सरपंच पद के लिए मतदान की नौबत नहीं आई। उनके बेटे वीरेंद्र चौधरी के नाम पर नवगठित ग्राम पंचायत का नाम रखा गया है।
78 साल की उम्र में भीखी देवी को फिर मिली जिम्मेदारी
राजस्थान में पंचायत चुनाव के बीच बाड़मेर जिले की वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत चर्चा में है। यहां ग्रामीणों ने एक बार फिर 78 वर्षीय भीखी देवी को सरपंच चुना है। खास बात यह है कि उन्हें लगातार सातवीं बार निर्विरोध चुना गया है। नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने तक उनके सामने कोई दूसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं आया। इसके बाद उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। इस तरह गांव में सरपंच पद के लिए मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
1994-95 से जारी है निर्विरोध चुने जाने का सिलसिला
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भीखी देवी पहली बार वर्ष 1994-95 में सरपंच बनी थीं। इसके बाद से उनका निर्विरोध चुने जाने का सिलसिला जारी रहा। इस बार भी किसी अन्य प्रत्याशी ने उनके खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा। हालांकि, उनके कार्यकालों और चुनावी रिकॉर्ड से जुड़े सभी आधिकारिक विवरणों का सत्यापन जरूरी है। स्थानीय स्तर पर उनकी लगातार निर्विरोध जीत को ग्रामीणों के भरोसे से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरपंच के साथ सभी सात वार्ड पंच भी निर्विरोध
वीरेंद्र नगर ग्राम पंचायत में सिर्फ सरपंच पद पर ही सर्वसम्मति नहीं बनी। पंचायत के सभी सात वार्डों में भी वार्ड पंच निर्विरोध चुने गए हैं। इससे पूरी पंचायत बिना मतदान के गठित हो गई। आमतौर पर पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों के बीच मुकाबला और प्रचार देखने को मिलता है। लेकिन यहां सभी पदों पर निर्विरोध निर्वाचन होने से यह पंचायत अलग पहचान बना रही है। ग्रामीणों की इस सहमति के पीछे क्या वजह रही, इस पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी की पत्नी हैं भीखी देवी
भीखी देवी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हेमाराम चौधरी की पत्नी हैं। हेमाराम चौधरी छह बार विधायक रह चुके हैं। वे राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं। राजनीतिक परिवार से संबंध होने के बावजूद भीखी देवी की पहचान गांव की सरपंच के रूप में रही है। स्थानीय स्तर पर उनके निर्विरोध निर्वाचन को ग्रामीणों के समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, ग्रामीणों के भरोसे और उनके विकास कार्यों से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
बेटे वीरेंद्र चौधरी के नाम पर बनी ग्राम पंचायत
इस मामले का एक भावनात्मक पहलू भी है। जानकारी के अनुसार, पहले यह क्षेत्र बायतु भीमजी ग्राम पंचायत का हिस्सा था। बाद में नई ग्राम पंचायत वीरेंद्र नगर बनाई गई। इसका नाम भीखी देवी और हेमाराम चौधरी के बेटे वीरेंद्र चौधरी के नाम पर रखा गया। वीरेंद्र चौधरी पेशे से डॉक्टर थे और बीमारी के कारण कम उम्र में उनका निधन हो गया था। वे परिवार के इकलौते बेटे थे। नई ग्राम पंचायत बनने के बाद भी भीखी देवी को ही सरपंच चुना गया।
राजस्थान पंचायत चुनाव में चर्चा का विषय बनी वीरेंद्र नगर पंचायत
राजस्थान में पंचायत चुनाव के दौरान कई जगह उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं, वीरेंद्र नगर में सरपंच और सभी सात वार्ड पंचों का निर्विरोध चुना जाना चर्चा में है। भीखी देवी की लगातार सातवीं निर्विरोध जीत इस पंचायत की खास पहचान बन गई है। अब पंचायत के सामने स्थानीय विकास और ग्रामीण सुविधाओं से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।