बाड़मेर में 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को अंतिम सांस तक उम्रकैद, 3 महीने में आया फैसला
बाड़मेर में सात वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो न्यायालय ने आरोपी मगसिंह को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 1.75 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया। घटना के करीब तीन महीने के भीतर मामले का फैसला आया। पुलिस ने जांच पूरी कर महज 13 दिनों में न्यायालय में चालान पेश कर दिया था। अदालत ने बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को विशेष निर्देश भी दिए हैं।

मुख्य बातें
- बाड़मेर में मासूम से दुष्कर्म के दोषी को अंतिम सांस तक उम्रकैद
- 7 साल की बच्ची से दुष्कर्म का मामला, तीन महीने में आरोपी को सजा
- 13 दिन में चालान, 3 महीने में फैसला: बाड़मेर में दोषी को उम्रकैद
BARMER, 03 NOV. 2026:
घर के बाहर खेल रही बच्ची को बहला-फुसलाकर ले गया था आरोपी
पुलिस के अनुसार, 19 जुलाई 2026 को सात वर्षीय बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी मगसिंह उसे बहला-फुसलाकर सुनसान स्थान पर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पीड़िता के पिता ने महिला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की। बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया गया और आरोपी को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया।
13 दिनों में जांच पूरी कर न्यायालय में पेश किया चालान
मामले के जांच अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य ने बताया कि पुलिस ने घटना के बाद तेजी से जांच की। पीड़िता से जुड़े आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की गईं। इसके बाद महज 13 दिनों में न्यायालय के समक्ष चालान पेश कर दिया गया। पुलिस की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। करीब तीन महीने में मामले की सुनवाई पूरी हुई और अदालत ने फैसला सुना दिया।
20 गवाहों और 44 दस्तावेजों के आधार पर सुनाया फैसला
पॉक्सो न्यायालय के विशिष्ट लोक अभियोजक दामोदर लेगा के अनुसार, सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 20 गवाह पेश किए। इसके अलावा 44 दस्तावेज और 18 अन्य साक्ष्य भी प्रस्तुत किए गए। इन साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना। पॉक्सो न्यायालय के विशिष्ट न्यायाधीश अमिताभ आचार्य ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए मगसिंह को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 1.75 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया।
कलेक्टर और एसपी को बालिकाओं की सुरक्षा के निर्देश
फैसले के साथ ही न्यायालय ने बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को स्कूलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इस निर्देश का उद्देश्य बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को कम करना और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाना है।
आरोपी की पैरवी नहीं करने का बार एसोसिएशन ने लिया था फैसला
इस मामले में बाड़मेर बार एसोसिएशन का रुख भी चर्चा में रहा। एसोसिएशन ने आरोपी की ओर से पैरवी नहीं करने का फैसला लिया था। वहीं, पुलिस की त्वरित जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों के बाद न्यायालय ने तीन महीने के भीतर मामले का निस्तारण कर दिया। यह फैसला बालिकाओं के विरुद्ध अपराधों में समयबद्ध जांच और प्रभावी न्यायिक प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करता है।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य ने बताया कि पुलिस ने घटना के बाद तेजी से जांच की
इस खबर में कोई गलती दिखी? हमें बताएं





