ईरान-अमेरिका तनाव का भारत पर असर, खाड़ी देशों में प्रवासी भारतीयों की नौकरियों पर मंडराया संकट
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत पर भी दिखाई देने लगा है। एक ओर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की नौकरियों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। रोजगार में गिरावट और नई भर्तियों में कमी से प्रवासी भारतीयों की चिंता बढ़ गई है।
भारत पर दोहरा आर्थिक दबाव
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर घरेलू महंगाई और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, खाड़ी देशों में कार्यरत लाखों भारतीयों की आय और रोजगार प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ रही है, जिससे भारत आने वाले विदेशी मुद्रा प्रेषण (रेमिटेंस) पर असर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों में रोजगार के अवसर घटे
संयुक्त अरब अमीरात समेत कई खाड़ी देशों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने की खबरें सामने आ रही हैं। पर्यटन, विमानन, आतिथ्य और सेवा क्षेत्र में मांग घटने से कई कंपनियां खर्च कम करने की दिशा में कदम उठा रही हैं। इसके चलते कुछ कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुई हैं, जबकि कई संस्थानों ने नई भर्तियां भी रोक दी हैं। इससे विशेष रूप से प्रवासी कामगारों के सामने रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
प्रवासी कामगारों की बढ़ी मुश्किलें
रोजगार में आई सुस्ती का असर घरेलू कामगारों, होटल कर्मचारियों, कैटरिंग स्टाफ और अन्य सेवा क्षेत्रों में काम करने वाले प्रवासियों पर भी देखा जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि पहले की तुलना में काम के अवसर कम हो गए हैं और आय में भी गिरावट आई है। जिन लोगों की नौकरियां चली गई हैं, उनके सामने परिवार के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और आर्थिक जिम्मेदारियां निभाना बड़ी चुनौती बन गया है।
सर्वे में भी दिखी भर्ती में सुस्ती
एक हालिया रोजगार सर्वेक्षण के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात के कई नियोक्ता आने वाली तिमाहियों में कर्मचारियों की संख्या घटाने या नई भर्ती टालने की योजना बना रहे हैं। सर्वे के संकेत बताते हैं कि कारोबारी माहौल में बनी अनिश्चितता का असर रोजगार बाजार पर पड़ सकता है। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति अलग-अलग है और सभी उद्योग समान रूप से प्रभावित नहीं हुए हैं।
सरकार और उद्योग जगत को सुधार की उम्मीद
यूएई सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को गति देने और कारोबार को समर्थन देने के लिए राहत पैकेजों की घोषणा की है। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा सुस्ती अस्थायी हो सकती है और हालात सामान्य होने के साथ रोजगार बाजार में भी सुधार आएगा। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का भी मानना है कि क्षेत्रीय तनाव कम होने पर व्यापार और निवेश की गतिविधियां फिर से तेज हो सकती हैं।