अलवर में वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़, फाइनेंस रिकवरीकर्मी समेत दो गिरफ्तार, 13 वाहन बरामद
अलवर जिले में वाहन चोरी की बढ़ती घटनाओं के बीच पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। वैशाली नगर थाना पुलिस और जिला स्पेशल टीम (DST) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक संगठित वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फाइनेंस रिकवरीकर्मी सहित दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 13 चोरी के वाहन बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि आरोपी चोरी के वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर बदलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे और उन्हें बेचने की तैयारी में जुटे हुए थे।
कार चोरी की शिकायत से खुला पूरे नेटवर्क का राज
मामले की शुरुआत जनता कॉलोनी बेलाका निवासी एक व्यक्ति द्वारा वैशाली नगर थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से हुई। परिवादी ने अपनी मारुति ईको कार चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना पुलिस और डीएसटी टीम को जांच में लगाया गया। तकनीकी साक्ष्यों, मुखबिर तंत्र और लगातार निगरानी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही। कार्रवाई के दौरान दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें वाहन चोरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ।
फाइनेंस रिकवरीकर्मी निकला गिरोह का अहम सदस्य
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक फाइनेंस रिकवरी का काम करता था। इसी पेशे का फायदा उठाकर वह वाहनों की जानकारी जुटाता और बाद में गिरोह के साथ मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। आरोपियों ने पूछताछ में कई वाहन चोरी की घटनाओं में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और विभिन्न जिलों में चोरी के वाहन खपाने का काम कर रहा था।
13 वाहन और तकनीकी उपकरण बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई मारुति ईको कार, एक बोलेरो, एक टैम्पू और 10 मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। बरामद दोपहिया वाहनों में केटीएम, आर-15 और कई हीरो मोटरसाइकिलें शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने मास्टर चाबी, डाई सेट, लैपटॉप और अन्य उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल वाहनों की पहचान बदलने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किया जाता था। बरामद सामान से संकेत मिलता है कि गिरोह काफी सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।
इंजन और चेसिस नंबर बदलकर तैयार करते थे फर्जी कागजात
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी चोरी के वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर डाई सेट की मदद से बदल देते थे। इसके बाद वाहनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस को ऐसे कई दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों ने वाहन चोरी को केवल अपराध नहीं बल्कि एक व्यवस्थित कारोबार का रूप दे रखा था।
गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी
अलवर पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि मामले में आगे की जांच जारी है और गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि चोरी के वाहनों को किन-किन क्षेत्रों में बेचा गया और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। बरामद वाहनों की वास्तविक मालिकों से पहचान कर उन्हें वापस सौंपने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।