जौहर पर स्वरा भास्कर की टिप्पणी से भड़की करणी सेना, बोली- ‘हिम्मत है तो हलाला पर सवाल उठाएं’
स्वरा भास्कर की जौहर को लेकर कथित टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। राजस्थान में करणी सेना की महिला विंग की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने अभिनेत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वरा भास्कर ने राजपूत क्षत्राणियों के बलिदान और जौहर की परंपरा का अपमान किया है। करणी सेना ने अभिनेत्री से अपने बयान पर सफाई देने की मांग करते हुए कहा कि अगर उन्हें धार्मिक परंपराओं पर सवाल उठाने हैं तो दूसरे धर्मों की प्रथाओं पर भी सवाल करें। हालांकि, विवाद के बीच स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा।
करणी सेना ने स्वरा भास्कर के बयान पर जताई नाराजगी
करणी सेना की महिला विंग की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने स्वरा भास्कर की कथित टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री को राजपूत इतिहास और जौहर की ऐतिहासिक परिस्थितियों की जानकारी नहीं है। राठौड़ के मुताबिक, जौहर को कायरता बताना उन महिलाओं के बलिदान का अपमान है, जिन्हें राजपूत समाज में वीरांगना के रूप में सम्मान दिया जाता है। उन्होंने कहा कि करणी सेना इस टिप्पणी का विरोध करती है और अभिनेत्री को अपनी भाषा पर ध्यान देना चाहिए। यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर सामने आए स्वरा भास्कर के एक वीडियो को लेकर दी गई है।
‘क्षत्राणियों के बलिदान का अपमान बर्दाश्त नहीं’
कीर्ति राठौड़ ने कहा कि राजपूत समाज के इतिहास में जौहर को महिलाओं के सामूहिक बलिदान की घटना के रूप में देखा जाता है। उन्होंने दावा किया कि इतिहास में कई क्षत्राणियों ने विदेशी आक्रमणकारियों के हाथों बंदी बनने के बजाय सामूहिक रूप से अपने प्राण त्यागने का निर्णय लिया। राठौड़ ने रानी पद्मिनी का भी उल्लेख किया और कहा कि राजपूत समाज में उनके बलिदान को आज भी सम्मान की नजर से देखा जाता है। उन्होंने स्वरा भास्कर से इतिहास को समझने और टिप्पणी करने से पहले पर्याप्त जानकारी हासिल करने की बात कही।
करणी सेना की चुनौती- ‘हलाला पर भी सवाल उठाकर दिखाएं’
करणी सेना नेता ने अपने बयान में स्वरा भास्कर को हलाला की प्रथा पर सवाल उठाने की चुनौती भी दी। कीर्ति राठौड़ ने कहा कि अगर अभिनेत्री धार्मिक और सामाजिक परंपराओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करती हैं तो उन्हें सभी समुदायों की प्रथाओं पर समान नजरिया रखना चाहिए। उन्होंने स्वरा भास्कर से अपने शब्दों पर पुनर्विचार करने की बात कहते हुए कहा कि हिंदू क्षत्राणियों के शौर्य और बलिदान को अपमानजनक तरीके से पेश करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, हलाला को लेकर किए गए उनके दावों को यहां उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
‘स्वरा भास्कर पहले अपना होमवर्क करें’
कीर्ति राठौड़ ने कहा कि राजपूत समाज की ऐतिहासिक घटनाओं पर टिप्पणी करने से पहले स्वरा भास्कर को इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जौहर की घटनाओं को केवल आज के नजरिए से देखने के बजाय उस दौर की परिस्थितियों और युद्धकालीन सामाजिक व्यवस्था के संदर्भ में समझने की जरूरत है। करणी सेना नेता ने अभिनेत्री से अपनी भाषा सुधारने की अपील भी की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि राजपूत समाज की महिलाओं और उनके बलिदान को लेकर अपमानजनक टिप्पणी किए जाने पर संगठन इसका विरोध जारी रखेगा।
‘कायर’ वाले बयान पर स्वरा भास्कर ने दी सफाई
विवाद बढ़ने के बाद स्वरा भास्कर की ओर से सोशल मीडिया पर सफाई सामने आई। अभिनेत्री ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली किसी भी महिला को कायर नहीं कहा। स्वरा ने कहा कि अगर लोग उनके विचारों से असहमत हैं तो उनकी आलोचना कर सकते हैं, लेकिन उनके वास्तविक बयान के आधार पर ही प्रतिक्रिया दी जानी चाहिए। इस सफाई के बाद भी सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो और नई पोस्ट को लेकर बहस जारी है।
जौहर को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
जौहर भारतीय इतिहास के सबसे संवेदनशील और विवादित विषयों में से एक है। राजपूत समाज में इसे युद्ध के दौरान महिलाओं द्वारा सामूहिक आत्मबलिदान और सम्मान की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, आधुनिक इतिहास और लैंगिक अधिकारों के नजरिए से इस पर अलग-अलग मत मौजूद हैं। यही वजह है कि जौहर पर सार्वजनिक टिप्पणी अक्सर राजनीतिक और सामाजिक विवाद का कारण बन जाती है। स्वरा भास्कर की कथित टिप्पणी और उसके बाद आई सफाई ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक विषय को सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
अब विवाद में आगे क्या होगा?
स्वरा भास्कर की सफाई के बावजूद करणी सेना की नाराजगी कम होती नजर नहीं आ रही है। संगठन की ओर से अभिनेत्री के बयान का विरोध जारी रखने की बात कही गई है। दूसरी ओर, स्वरा भास्कर का कहना है कि उनके शब्दों को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। ऐसे में विवाद का अगला चरण दोनों पक्षों की आगे की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल मामला सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों तक सीमित नजर आ रहा है।