राजस्थान निकाय चुनाव: आरक्षण के बाद नामांकन रद्द होने से बदले समीकरण, कहीं BJP तो कहीं कांग्रेस को झटका
Rajasthan Nikay Chunav: राजस्थान निकाय चुनाव की सियासी बिसात पर हर दिन नए समीकरण सामने आ रहे हैं। चुनाव से पहले आरक्षण की लॉटरी ने कई दावेदारों के गणित को बदल दिया था। इसके बाद टिकट वितरण को लेकर दोनों प्रमुख दलों में बगावत हुई और अब नामांकन पत्रों की जांच व नाम वापसी ने कई वार्डों का चुनावी गणित पूरी तरह बदल दिया है। कहीं प्रत्याशियों के पर्चे खारिज होने से पार्टी को नुकसान हुआ है तो कहीं नाम वापस लेने के बाद उम्मीदवार निर्विरोध पार्षद बन गए हैं।
आरक्षण से शुरू हुआ था समीकरण बदलने का सिलसिला
राजस्थान निकाय चुनाव की घोषणा के बाद सबसे पहले आरक्षण की प्रक्रिया ने राजनीतिक दलों की तैयारियों को प्रभावित किया। कई वार्डों की आरक्षण श्रेणी बदलने से पहले से चुनावी तैयारी कर रहे नेताओं को पीछे हटना पड़ा। कुछ नेताओं ने अपने परिवार के सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी की। इसके बाद जब बीजेपी और कांग्रेस ने टिकट बांटे तो कई जगह पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों में नाराजगी देखने को मिली।
टिकट बंटवारे के बाद बगावत ने बढ़ाई मुश्किल
टिकट वितरण के बाद दोनों प्रमुख दलों के सामने बागियों को मनाने की चुनौती खड़ी हो गई। कई दावेदारों ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ निर्दलीय नामांकन दाखिल कर दिया। वहीं कुछ स्थानों पर पार्टी प्रत्याशियों ने भी अंतिम समय में अपना नाम वापस ले लिया। ऐसे में जिस वार्ड में पार्टी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही थी, वहां अचानक मुकाबला बदल गया। अब नामांकन पत्रों की जांच के बाद कई और सीटों पर राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं।
टोडारायसिंह में कांग्रेस प्रत्याशी ने नाम वापस लिया
टोंक जिले की टोडारायसिंह नगरपालिका के वार्ड 23 में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। यहां कांग्रेस प्रत्याशी शंकर ने अपना नामांकन वापस ले लिया। उनके मैदान से हटने के बाद बीजेपी के संत कुमार जैन अकेले प्रत्याशी रह गए और उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया। टोडारायसिंह को कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का गृह क्षेत्र बताया जाता है। कांग्रेस के प्रत्याशी के नाम वापस लेने से इस वार्ड में चुनावी मुकाबला मतदान से पहले ही खत्म हो गया।
सीकर में BJP प्रत्याशी के नाम वापस लेने से बदला गणित
सीकर नगर परिषद के वार्ड 65 में बीजेपी को झटका लगा। यहां पार्टी प्रत्याशी पिंकी पवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद कांग्रेस की माया देवी अकेली प्रत्याशी रह गईं और उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया। इस घटनाक्रम ने दिखाया कि नामांकन वापसी भी चुनावी समीकरणों पर कितना बड़ा असर डाल सकती है। जिस वार्ड में दोनों दलों के बीच मुकाबला होना था, वहां अब मतदान की स्थिति नहीं रही।
हिंडौली में BJP का पर्चा खारिज, कांग्रेस निर्विरोध
बूंदी जिले की हिंडौली नगरपालिका के वार्ड 20 में बीजेपी प्रत्याशी जितेंद्र सिंह का नामांकन जांच के दौरान खारिज हो गया। इसके बाद कांग्रेस के हनुमान व्यास अकेले उम्मीदवार रह गए। ऐसे में उनका निर्विरोध निर्वाचन तय माना गया। नामांकन रद्द होने से बीजेपी के लिए यह बड़ा झटका है, जबकि कांग्रेस को बिना मतदान के ही वार्ड मिलने की स्थिति बन गई है। आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
बीकानेर में कांग्रेस का नामांकन रद्द, BJP को फायदा
बीकानेर नगर निगम के वार्ड 69 में कांग्रेस प्रत्याशी ममता का नामांकन भी खारिज हो गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने कांग्रेस का सिंबल मिलने से पहले RLP से नामांकन दाखिल किया था। बाद में कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया, लेकिन RLP की ओर से सिंबल नहीं मिलने के कारण उनका नामांकन मान्य नहीं हो सका। इसके बाद बीजेपी की लीला गहलोत अकेली प्रत्याशी रह गईं और उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया।
डूंगरपुर में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा रद्द
डूंगरपुर नगर परिषद के वार्ड 23 में भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। यहां कांग्रेस प्रत्याशी गणेश कटारा का नामांकन आपराधिक मामले से संबंधित कारणों के चलते खारिज होने की जानकारी सामने आई है। पर्चा रद्द होने के बाद बीजेपी के मनन कलासुआ ही मैदान में बचे। ऐसे में उनका निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया। मनन कलासुआ बीजेपी के पूर्व एवं निवर्तमान सभापति अमृत कलासुआ के बेटे बताए गए हैं।
कई वार्डों में नामांकन रद्द होने से बदला मुकाबला
टोडारायसिंह, सीकर, हिंडौली, बीकानेर और डूंगरपुर के मामले इस बदलते चुनावी गणित के उदाहरण हैं। इसके अलावा प्रदेश के कई अन्य निकायों में भी नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उम्मीदवारों के पर्चे खारिज हुए हैं। कुछ जगह पार्टी का चुनाव चिन्ह समय पर उपलब्ध नहीं होने से प्रत्याशियों को नुकसान होने की बात सामने आई है। इन घटनाक्रमों के कारण कई वार्डों में मुकाबला पहले की तुलना में पूरी तरह बदल गया है।
अब नाम वापसी के बाद साफ होगी अंतिम तस्वीर
राजस्थान निकाय चुनाव में अभी नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद कई वार्डों की अंतिम तस्वीर और स्पष्ट होगी। कुछ प्रत्याशी मैदान छोड़ सकते हैं तो कुछ बागी उम्मीदवारों के बने रहने से मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए अब हर वार्ड का समीकरण अलग चुनौती बन गया है। आरक्षण से शुरू हुआ बदलाव अब टिकट, नामांकन रद्द होने और नाम वापसी तक पहुंच चुका है। अंतिम चुनावी तस्वीर सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि किस पार्टी को इन बदलावों का सबसे ज्यादा फायदा और नुकसान हुआ।