रूसी ड्रोन हमले में 4 भारतीयों की मौत पर क्रेमलिन की पहली प्रतिक्रिया, कहा- भारत के साथ लगातार संपर्क में हैं
काला सागर में एक कार्गो जहाज पर हुए रूसी हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत के बाद रूस ने पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस इस मामले में भारतीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। वहीं भारत ने घटना पर गहरी चिंता जताते हुए वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा की है और प्रभावित भारतीयों को हरसंभव सहायता देने का भरोसा दिया है।
क्रेमलिन ने कहा- भारतीय अधिकारियों के संपर्क में हैं
चार भारतीय नागरिकों की मौत के बाद रूस की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि इस घटना को लेकर रूसी अधिकारी भारतीय पक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब भारत ने इस मामले पर रूस के वरिष्ठ राजनयिक को तलब कर अपनी चिंता दर्ज कराई थी। हालांकि, रूस की ओर से हमले के कारणों पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई।
काला सागर में कार्गो जहाज पर हुआ था हमला
यूक्रेन के अनुसार, रूस ने ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले कार्गो जहाज एमवी गोल्डन लियो पर तीन क्रूज मिसाइलें दागीं। इस हमले में कुल 10 लोगों की मौत हुई, जिनमें चार भारतीय नागरिक भी शामिल थे। जहाज पर भारत और सीरिया के चालक दल के सदस्य सवार थे। यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर रही है।
विदेश मंत्रालय ने सहायता का दिया भरोसा
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हुई, जबकि एक अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हुआ है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। मंत्रालय ने कहा कि यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित नागरिकों तथा उनके परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही सरकार ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की है।
भारत ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमले की निंदा की
भारत ने अपने आधिकारिक बयान में किसी देश का नाम लिए बिना वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि निर्दोष चालक दल के सदस्यों की जान जोखिम में डालना और समुद्री व्यापार व जहाजरानी की स्वतंत्रता को बाधित करना स्वीकार्य नहीं है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मानकों के पालन और ऐसे हमलों से बचने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
युद्ध के बीच भारतीय नाविकों की मौत का पहला मामला
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद किसी समुद्री हमले में भारतीय नाविकों की मौत का यह पहला मामला माना जा रहा है। इस घटना ने युद्ध क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी पक्षों की साझा जिम्मेदारी है, ताकि निर्दोष नागरिकों की जान जोखिम में न पड़े।