क्या एक मंच पर आएंगे रविंद्र सिंह भाटी और हनुमान बेनीवाल? EWS आंदोलन के बीच सियासी चर्चा तेज
राजस्थान की राजनीति में रविंद्र सिंह भाटी और हनुमान बेनीवाल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में दोनों नेता किसी साझा मंच पर नजर आ सकते हैं? इस चर्चा को हालिया बयानों और राजनीतिक गतिविधियों से हवा मिली है। हालांकि, अभी दोनों नेताओं के बीच किसी औपचारिक गठबंधन या राजनीतिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है।मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भाटी इन दिनों EWS आरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं। वहीं, हनुमान बेनीवाल की RLP भी राजस्थान में अपनी राजनीतिक भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रही है। जून 2026 में बेनीवाल ने भाटी के साथ भविष्य में काम करने की संभावना पर सकारात्मक संकेत दिए थे।
भाटी के EWS आंदोलन से बढ़ी चर्चा
रविंद्र सिंह भाटी ने हाल में EWS से जुड़े मुद्दों को लेकर पश्चिमी राजस्थान में यात्रा शुरू की है। इस दौरान EWS वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व, प्रमाण पत्र की अवधि और केंद्र-राज्य नियमों में समानता जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं। भाटी ने EWS प्रमाण पत्र की वैधता बढ़ाने और प्रक्रिया को आसान बनाने की मांग भी रखी है।इसी आंदोलन के बीच जब RLP के नेता नारायण बेनीवाल से भाटी की राजनीति और आंदोलन को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने साथ मिलकर लड़ाई की जरूरत की बात कही। उनके बयान को दोनों नेताओं के बीच संभावित राजनीतिक नजदीकी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
जून में हनुमान बेनीवाल ने भी दिए थे संकेत
रविंद्र सिंह भाटी और हनुमान बेनीवाल के साथ आने की चर्चा बिल्कुल नई नहीं है। जून 2026 में हनुमान बेनीवाल ने कहा था कि यदि भाटी साथ आना चाहें तो दोनों राजस्थान के विकास और नई राजनीति की दिशा में काम कर सकते हैं। उस समय बेनीवाल ने यह भी कहा था कि उनकी ओर से भाटी के लिए कोई दरवाजा बंद नहीं है।हालांकि उसी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट था कि उस समय बेनीवाल और भाटी के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी। इसलिए इन बयानों को राजनीतिक संभावना के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन इन्हें गठबंधन की घोषणा नहीं माना जा सकता।
कभी तीखे रहे हैं दोनों नेताओं के तेवर
भाटी और बेनीवाल की राजनीतिक शैली में कई समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों नेता सड़क पर आंदोलनों और जन मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। हालांकि, दोनों के बीच राजनीतिक दूरी और मतभेद भी सामने आते रहे हैं।2024 में हनुमान बेनीवाल ने एक इंटरव्यू में भाटी की लोकप्रियता और उनके राजनीतिक अनुभव को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद दोनों नेताओं को एक साथ लेकर राजनीतिक चर्चाएं भी होती रही हैं।हाल के समय में हालांकि कुछ मुद्दों पर दोनों के रुख एक जैसे दिखाई दिए हैं। मई 2026 में भाटी ने बेनीवाल से जुड़े एक आंदोलन के मुद्दे पर समर्थन जताया था। इससे भी दोनों नेताओं के बीच मुद्दा आधारित नजदीकी की चर्चा को बल मिला।
राजस्थान में तीसरे राजनीतिक विकल्प की चर्चा
हनुमान बेनीवाल की RLP लंबे समय से कांग्रेस और भाजपा के अलावा अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश करती रही है। जून 2026 में बेनीवाल ने RLP और भारत आदिवासी पार्टी के साथ मिलकर पंचायत चुनाव लड़ने की बात भी कही थी। उन्होंने युवा नेताओं के साथ काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।ऐसे में रविंद्र सिंह भाटी जैसे स्वतंत्र विधायक के साथ संभावित तालमेल की चर्चा को राजस्थान में वैकल्पिक राजनीति की बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि यह अभी राजनीतिक विश्लेषण और चर्चाओं का विषय है। किसी औपचारिक गठबंधन की पुष्टि सामने नहीं आई है।
क्या सच में एक मंच पर आएंगे भाटी और बेनीवाल?
फिलहाल इसका कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। उपलब्ध बयानों से इतना जरूर स्पष्ट है कि हनुमान बेनीवाल ने भाटी के साथ भविष्य में काम करने की संभावना को खारिज नहीं किया है। वहीं भाटी अपने स्तर पर EWS और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं।इसलिए फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक नजदीकी की चर्चा कहना ज्यादा उचित होगा। आने वाले समय में दोनों नेताओं की मुलाकात, साझा कार्यक्रम या किसी मुद्दे पर संयुक्त आंदोलन जैसी गतिविधियां इस चर्चा को नया रूप दे सकती हैं। लेकिन अभी किसी राजनीतिक गठबंधन या साझा मंच की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।