शिवाजी पार्क में प्रदर्शन पर रोक तो दिल्ली मेट्रो बंद करने पर क्यों नहीं? अभिजीत दिपके का सवाल
मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर विवाद के बीच CJP नेता अभिजीत दिपके ने दिल्ली के घटनाक्रम का हवाला देते हुए सवाल उठाया है। दिपके ने पूछा कि अगर प्रदर्शन के कारण आम लोगों को होने वाली परेशानी को अनुमति रोकने का आधार बनाया जा रहा है, तो दिल्ली में प्रदर्शन के मद्देनजर कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास बंद किए जाने को किस नजर से देखा जाना चाहिए?दिपके का यह बयान ऐसे समय आया है, जब CJP ने 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया था। मुंबई पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। वहीं दिल्ली में भी जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी और सुरक्षा कारणों से कई इलाकों में प्रतिबंध लगाए गए।
दिपके ने दिल्ली का उदाहरण देकर उठाया सवाल
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर दिल्ली की स्थिति का जिक्र करते हुए सवाल किया कि अगर प्रदर्शन के कारण जनता को परेशानी होने की बात कही जा रही है, तो दिल्ली में मेट्रो सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों को कैसे देखा जाए।उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक प्रदर्शन और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाया जाना चाहिए। दिपके ने इसी तुलना के जरिए शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने पर सवाल उठाया है।हालांकि, यह दिपके का राजनीतिक तर्क है। दिल्ली और मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय परिस्थितियां और प्रशासनिक निर्णय अलग-अलग हैं। इसलिए दोनों घटनाओं को पूरी तरह समान मानना जरूरी नहीं है।
शिवाजी पार्क में किस मुद्दे पर प्रदर्शन?
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का ऐलान किया था। संगठन ने SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भी सवाल उठाए हैं।CJP के मुताबिक यह आंदोलन देशभर में चलाए जाने वाले अभियान की शुरुआत है। संगठन ने इसे ‘जेल भरो आंदोलन’ का नाम दिया है। हालांकि मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पुलिस ने अनुमति क्यों नहीं दी?
शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर पुलिस की ओर से स्थानीय व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सामने रखे गए हैं। आयोजन से संभावित भीड़, यातायात और आसपास के क्षेत्र में आवाजाही पर असर को लेकर प्रशासनिक चिंताएं बताई गई हैं।CJP ने अनुमति नहीं मिलने के बावजूद प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। इसके चलते शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाई गई है। सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त बल और निगरानी के इंतजाम किए गए हैं।
दिल्ली में 11 मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद
2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन का कार्यक्रम था। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी थी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत नई दिल्ली इलाके में BNSS की धारा 163 लागू की गई।इसी बीच DMRC ने 11 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद कर दिए। इनमें जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली शामिल हैं। कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई।
दिल्ली में भी पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी
दिल्ली पुलिस के मुताबिक जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए थे।जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कई रास्तों पर यातायात को नियंत्रित किया गया। दिल्ली पुलिस ने लोगों से प्रभावित इलाकों से बचने और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की थी।
अब शिवाजी पार्क पर टिकी नजर
दिल्ली के घटनाक्रम का उदाहरण देकर अभिजीत दिपके ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति को लेकर बहस को नया मुद्दा दे दिया है। उनका सवाल प्रशासनिक फैसलों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन को लेकर है।फिलहाल CJP प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहा है, जबकि मुंबई पुलिस ने अनुमति नहीं दी है। ऐसे में शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि प्रशासन और प्रदर्शन आयोजकों के बीच आगे क्या स्थिति बनती है।