राजस्थान पंचायत चुनाव बनाम स्कूल परीक्षाएं: शिक्षकों में असमंजस, दिवाली छुट्टियों पर भी संकट
भीलवाड़ा। राजस्थान में पंचायत चुनाव और स्कूलों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं की तारीखें करीब आने से शिक्षकों के सामने नई परेशानी खड़ी हो गई है। एक ओर शिक्षा विभाग ने 15 से 29 अक्टूबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित की हैं। दूसरी ओर पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अक्टूबर से नवंबर तक चलेगी। ऐसे में शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी और परीक्षा व्यवस्था दोनों संभालने की चुनौती सामने आ सकती है।इसके अलावा नवंबर में दीपावली का अवकाश भी निर्धारित है। चुनाव प्रशिक्षण और मतदान की जिम्मेदारियों के कारण शिक्षकों की छुट्टियां प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षक संगठन अब चुनाव और परीक्षा कार्यक्रम के बीच समन्वय की मांग कर रहे हैं।
परीक्षा और चुनाव की तारीखों में फंसा पेंच
शिक्षा विभाग की ओर से 15 से 29 अक्टूबर तक अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। इसी दौरान पंचायत चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। चुनाव ड्यूटी में शिक्षकों की तैनाती के साथ प्रशिक्षण भी कराया जाएगा।ऐसे में स्कूलों में परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, वीक्षक की ड्यूटी और अन्य परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि बड़ी संख्या में शिक्षक चुनाव ड्यूटी में लगाए जाते हैं, तो परीक्षा संचालन पर इसका असर पड़ सकता है।
दीपावली की छुट्टियों पर भी असर की आशंका
स्कूलों में 4 से 15 नवंबर तक दीपावली अवकाश निर्धारित बताया गया है। वहीं पंचायत चुनाव के चरण नवंबर में भी जारी रहेंगे।जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के मतदान के साथ पंच और सरपंच के चुनाव भी नवंबर में होंगे। ऐसे में चुनावी ड्यूटी और प्रशिक्षण के कारण शिक्षकों को अवकाश के दौरान भी जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है।हालांकि, शिक्षा विभाग की ओर से परीक्षा और अवकाश को लेकर अंतिम बदलाव की आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।
चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के अनुसार पंचायत चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को होगा।वहीं पंच और सरपंच पदों के लिए मतदान 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को प्रस्तावित है। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक कराया जाएगा।पंच और सरपंच के वोटों की गिनती मतदान के दिन ही होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की मतगणना 20 नवंबर को प्रस्तावित है। इसके बाद जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव 25 से 28 नवंबर के बीच कराए जाने हैं।
शिक्षकों पर चुनाव ड्यूटी का दबाव
पंचायत चुनाव में सरकारी कर्मचारियों की बड़ी संख्या में ड्यूटी लगाई जाती है। इनमें शिक्षक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मतदान से पहले प्रशिक्षण, सामग्री वितरण, मतदान केंद्र की जिम्मेदारी और मतदान के बाद की प्रक्रिया में कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है।ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि यदि चुनाव और परीक्षाएं एक ही अवधि में रहती हैं, तो दोनों जिम्मेदारियों को संभालना मुश्किल हो सकता है।
शिक्षक संगठनों ने उठाई समन्वय की मांग
शिक्षक संगठनों ने चुनाव और परीक्षा कार्यक्रम के बीच बेहतर तालमेल की मांग की है। शिक्षक नेता नीरज शर्मा का कहना है कि चुनाव आयोग और शिक्षा विभाग को आपसी समन्वय के साथ तारीखें तय करनी चाहिए थीं।उनका कहना है कि शिक्षकों पर पहले से ही कई गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां रहती हैं। ऐसे में परीक्षा और चुनाव ड्यूटी एक साथ होने से अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।
अब विभाग के फैसले पर नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं का कार्यक्रम पहले की तरह रहेगा या इसमें बदलाव किया जाएगा। इसी तरह दीपावली अवकाश के दौरान चुनावी ड्यूटी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है।यदि चुनाव और परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव किया जाता है, तो शिक्षा विभाग को नया कार्यक्रम जारी करना होगा। वहीं, यदि दोनों कार्यक्रम अपने तय समय पर चलते हैं, तो शिक्षकों की ड्यूटी व्यवस्था और परीक्षा संचालन के लिए अतिरिक्त प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है।अब शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की नजर शिक्षा विभाग और राज्य निर्वाचन विभाग के अगले फैसले पर है।