पंचायत चुनाव से पहले नई अड़चन, MP में जन्मी ब्याही महिलाओं के OBC प्रमाण-पत्र पर सवाल
झालावाड़। राजस्थान में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच जाति प्रमाण-पत्र को लेकर एक नई समस्या सामने आई है। झालावाड़ जिले के गंगधार उपखंड में मध्यप्रदेश में जन्मी और राजस्थान में विवाह करने वाली महिलाओं के OBC जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। इससे आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे परिवारों की चिंता बढ़ गई है।डग पंचायत समिति क्षेत्र मध्यप्रदेश की सीमा से सटा हुआ है। यहां दोनों राज्यों के परिवारों के बीच लंबे समय से वैवाहिक संबंध रहे हैं। ऐसे में कई महिलाएं मध्यप्रदेश में जन्मी हैं, लेकिन विवाह के बाद वर्षों से राजस्थान में रह रही हैं। अब पंचायत चुनाव में आरक्षित सीटों पर दावेदारी के दौरान जाति प्रमाण-पत्र का मुद्दा सामने आ रहा है।
राजस्थान के पते पर बने हैं दस्तावेज
प्रभावित परिवारों का कहना है कि विवाह के बाद इन महिलाओं का स्थायी निवास राजस्थान में है। उनके आधार कार्ड, जन आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र में राजस्थान का पता दर्ज है। कुछ मामलों में राजस्थान में उनके नाम पर संपत्ति या भूमि भी दर्ज होने की बात सामने आई है।इसके बावजूद OBC जाति प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन करने पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इससे चुनावी तैयारियों में जुटे परिवारों के सामने दस्तावेज संबंधी परेशानी खड़ी हो गई है।
आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने के लिए जरूरी है प्रमाण-पत्र
पंचायतीराज चुनाव में OBC वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को संबंधित जाति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रमाण-पत्र समय पर जारी नहीं होने पर नामांकन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।चुनाव कार्यक्रम नजदीक होने के कारण प्रभावित परिवार प्रशासन से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत है, तो उसकी जानकारी समय रहते दी जानी चाहिए।
सीमावर्ती क्षेत्र में मामला क्यों महत्वपूर्ण?
गंगधार और डग क्षेत्र मध्यप्रदेश की सीमा से जुड़े हुए हैं। दोनों राज्यों के बीच सामाजिक और पारिवारिक संबंध पुराने हैं। ऐसे में दूसरे राज्य में जन्मी महिलाओं का राजस्थान में विवाह के बाद लंबे समय तक रहना सामान्य स्थिति है।इसी वजह से स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों के लिए प्रमाण-पत्र प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं। इससे पात्र आवेदकों को अंतिम समय में दस्तावेज संबंधी परेशानी से बचाया जा सकेगा।
तहसीलदार ने नियमों का दिया हवाला
मामले में गंगधार तहसीलदार गणेशलाल खंगार ने कहा कि राजस्थान के नियमानुसार जाति का निर्धारण पिता के आधार पर किया जाता है। उनके अनुसार इसी आधार पर संबंधित प्रकरण में जाति प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जा सकता।प्रशासन के इस पक्ष के बाद प्रभावित परिवारों के सामने यह सवाल है कि राजस्थान में विवाह के बाद लंबे समय से रह रही महिलाओं के लिए चुनावी आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया किस तरह लागू होगी।
चुनाव से पहले समाधान की मांग
क्षेत्रवासियों का कहना है कि पंचायत चुनाव की तारीखें नजदीक हैं। ऐसे में प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों पर प्रशासन को जल्द स्पष्ट मार्गदर्शन देना चाहिए। यदि नियमों के तहत किसी महिला की पात्रता बनती है, तो प्रमाण-पत्र समय पर जारी किया जाए।वहीं, यदि नियमों के कारण प्रमाण-पत्र जारी नहीं किया जा सकता, तो इसकी स्थिति भी स्पष्ट रूप से बताई जानी चाहिए। इससे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे परिवार समय रहते अपनी रणनीति तय कर सकेंगे।फिलहाल गंगधार क्षेत्र में OBC प्रमाण-पत्र का यह मुद्दा पंचायत चुनाव से पहले चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रभावित परिवारों की नजर अब प्रशासन की ओर से मिलने वाले अगले स्पष्टीकरण पर है।