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Rajasthan Panchayat Election: सरपंच प्रत्याशियों को सिंबल के बाद कुछ घंटों का प्रचार, चुनाव कार्यक्रम पर सवाल

जयपुर। राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 का कार्यक्रम जारी होने के बाद सरपंच पद के प्रत्याशियों के लिए प्रचार अवधि को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पहले चरण में सरपंच और पंच पदों के लिए मतदान 25 अक्टूबर को होना है। वहीं नामांकन की प्रक्रिया 22 से 24 अक्टूबर तक चलेगी। 24 अक्टूबर को नाम वापसी के बाद चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे। इसके अगले ही दिन सुबह 7 बजे मतदान शुरू होगा। ऐसे में अंतिम उम्मीदवारों को चुनाव चिह्न मिलने के बाद मतदाताओं तक अपना आधिकारिक सिंबल पहुंचाने के लिए बहुत कम समय मिलेगा।यह स्थिति खास तौर पर उन प्रत्याशियों के लिए चुनौती बन सकती है, जो चुनाव चिह्न मिलने के बाद घर-घर प्रचार पर निर्भर रहते हैं। हालांकि उम्मीदवार आचार संहिता लागू होने के बाद से अपने स्तर पर संपर्क अभियान कर सकते हैं, लेकिन अंतिम सिंबल का प्रचार केवल नाम वापसी के बाद ही संभव होगा।

पहले चरण का पूरा गणित समझिए

राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार पहले चरण के पंच और सरपंच चुनाव के लिए 22 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। 24 अक्टूबर को नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया होगी।इसके अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान कराया जाएगा। पंच और सरपंच का चुनाव मतपत्र के जरिए होगा और मतगणना भी मतदान समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायत मुख्यालय पर की जाएगी।यानी जिस प्रत्याशी का नाम 24 अक्टूबर को अंतिम सूची में रहता है, उसे उसी दिन अपना चुनाव चिह्न मिलेगा। इसके बाद अगले दिन मतदान शुरू हो जाएगा।

सिंबल मिलने के बाद प्रचार का समय कितना?

यही वह बिंदु है, जिस पर उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम प्रत्याशियों और उनके चुनाव चिह्न की स्थिति स्पष्ट होगी।ऐसे में प्रत्याशी के पास अपने सिंबल को मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए 24 अक्टूबर की शाम और रात का समय ही मुख्य रूप से बचता है। अगले दिन सुबह 7 बजे मतदान शुरू होने के कारण प्रचार के लिए एक पूरा दिन भी उपलब्ध नहीं होता।हालांकि यह कहना अधिक सटीक होगा कि चुनाव चिह्न मिलने के बाद प्रचार के लिए समय बहुत सीमित है, न कि पूरे चुनाव अभियान के लिए केवल कुछ घंटे हैं। उम्मीदवार पहले से मतदाताओं से संपर्क कर सकते हैं, लेकिन उस समय अंतिम चुनाव चिह्न की जानकारी नहीं होती।

राज्य निर्वाचन आयोग की बताई गई वजह

राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनाव कार्यक्रम को लेकर कहा है कि सरपंच चुनाव में धनबल और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशों की शिकायतें आती रही हैं।आयोग की ओर से यह तर्क दिया गया है कि नामांकन और मतदान के बीच लंबा अंतर रखने के बजाय प्रक्रिया को संक्षिप्त रखने से चुनाव में धनबल और जनबल के दुरुपयोग को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।आयुक्त के अनुसार, जो उम्मीदवार लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय है और जिसकी लोगों के बीच पहचान और व्यवहार अच्छा है, उसे इसका लाभ मिल सकता है।

बिना सिंबल के पहले से चल रहा संपर्क अभियान

चुनाव चिह्न मिलने में देरी का मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवार प्रचार ही नहीं कर सकते। आचार संहिता लागू होने के बाद प्रत्याशी मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं।गांवों में कई उम्मीदवार घर-घर जाकर लोगों से मिल रहे हैं। कुछ प्रत्याशी सोशल मीडिया और WhatsApp समूहों के जरिए भी अपनी पहचान बना रहे हैं। ऐसे अभियानों में उम्मीदवार का नाम और चेहरा प्रमुख रहता है।लेकिन चुनाव के दौरान मतपत्र पर प्रत्याशी का चुनाव चिह्न महत्वपूर्ण होता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई मतदाता प्रत्याशी के नाम के साथ उसके निशान से भी पहचान करते हैं।

उम्मीदवारों की असली चुनौती सिंबल पहचान की

सरपंच चुनाव में चुनाव चिह्न की भूमिका को देखते हुए अंतिम समय में सिंबल मिलने से उम्मीदवारों को उसे मतदाताओं तक पहुंचाने के लिए तेजी से काम करना होगा।प्रत्याशियों को अपने समर्थकों, परिवार और स्थानीय कार्यकर्ताओं के जरिए चुनाव चिह्न की जानकारी घर-घर पहुंचानी पड़ सकती है। सोशल मीडिया पर भी अंतिम समय में प्रचार सामग्री तैयार करनी होगी।इससे चुनावी प्रबंधन के लिए समय कम जरूर रहेगा, लेकिन उम्मीदवारों के पास पहले से मतदाताओं से संपर्क बनाने का अवसर मौजूद रहेगा।

चार चरणों में होंगे पंच-सरपंच चुनाव

राजस्थान की 14,403 ग्राम पंचायतों में पंच और सरपंच के चुनाव चार चरणों में होंगे। मतदान की तारीखें 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर 2026 निर्धारित हैं। इन पदों के चुनाव मतपत्र से होंगे।हर चरण में संबंधित ग्राम पंचायतों के लिए नामांकन, जांच, नाम वापसी और चुनाव चिह्न आवंटन की प्रक्रिया मतदान से ठीक पहले पूरी होगी। यही वजह है कि अलग-अलग चरणों में उम्मीदवारों के लिए सिंबल मिलने और मतदान के बीच का समय बेहद महत्वपूर्ण रहेगा।

क्या कार्यक्रम में बदलाव होगा?

सीमित प्रचार समय को लेकर उम्मीदवारों और समर्थकों के बीच चर्चा जरूर है। कुछ लोग चुनाव चिह्न आवंटन और मतदान के बीच अतिरिक्त समय देने की मांग कर रहे हैं।हालांकि उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के अनुसार फिलहाल मतदान की तारीखों में बदलाव की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि आयोग कार्यक्रम में संशोधन करेगा।अब निगाह इस बात पर रहेगी कि राज्य निर्वाचन आयोग सीमित प्रचार अवधि को लेकर उठ रहे सवालों पर कोई स्पष्टीकरण या बदलाव करता है या नहीं।

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Stv News Rajasthan

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