राजस्थान पंचायत चुनाव: 10 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर्स वाले विराट चौधरी हारे, 29 वोटों से गंवाई सरपंच सीट
राजस्थान के पंचायत चुनाव में सोशल मीडिया की लोकप्रियता सरपंच पद की जीत में तब्दील नहीं हो सकी। डीडवाना-कुचामन जिले की किनसरिया ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विराट चौधरी, जिन्हें धर्माराम के नाम से भी बताया गया है, हार गए। उन्हें 857 वोट मिले, जबकि विजेता गजराज सिंह राठौड़ को 886 वोट हासिल हुए। इस तरह विराट चौधरी को महज 29 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। लाखों फॉलोअर्स और बड़े डिजिटल दर्शक वर्ग के बावजूद यह नतीजा स्थानीय चुनावों में जमीनी संपर्क की अहमियत को सामने लाता है।

मुख्य बातें
- लाखों फॉलोअर्स वाले विराट चौधरी सरपंच चुनाव हारे, 29 वोटों से शिकस्त
- सोशल मीडिया स्टार विराट चौधरी को गांव में मिली हार
- 10 मिलियन से ज्यादा यूट्यूब सब्सक्राइबर्स, फिर भी नहीं जीत पाए चुनाव
NAGAUR,07 NOV. 2026:
29 वोटों से तय हुआ हार-जीत का फैसला
किनसरिया ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए मुकाबला काफी करीबी रहा। उपलब्ध चुनाव परिणाम के अनुसार, गजराज सिंह ने 886 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। वहीं धर्माराम नाम से दर्ज विराट चौधरी को 857 वोट मिले।दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर केवल 29 वोट रहा। इस परिणाम ने चुनावी मुकाबले को चर्चा में ला दिया है। खास बात यह रही कि सोशल मीडिया पर बड़ी पहचान रखने के बावजूद विराट चौधरी स्थानीय मतदाताओं का पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं कर सके।
सरपंच चुनाव परिणाम 2026
कौन हैं विराट चौधरी?
विराट चौधरी को सोशल मीडिया पर डिफेंस ट्रेनिंग और युवाओं को सेना-पुलिस भर्ती की तैयारी कराने वाले कंटेंट के लिए जाना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे कुचामन सिटी में कमांडो डिफेंस एकेडमी संचालित करते हैं। यहां युवाओं को शारीरिक और लिखित परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।इसके अलावा, उनके नाम से विराट चौधरी चिल्ड्रन एकेडमी स्कूल का भी उल्लेख मिलता है। उनके वीडियो में फिटनेस, अनुशासन, देशसेवा और भर्ती की तैयारी जैसे विषय प्रमुख रहते हैं। इसी वजह से युवाओं के बीच उनकी अच्छी पहचान बनी है।
फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर बड़ी फैन फॉलोइंग
विराट चौधरी की लोकप्रियता का अंदाजा उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मौजूद फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स से लगाया जाता है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार:
- फेसबुक: करीब 37 लाख फॉलोअर्स।
- इंस्टाग्राम: मुख्य अकाउंट पर 2.24 लाख से अधिक फॉलोअर्स।
- यूट्यूब: वीसीए स्कूल चैनल पर करीब 1.05 करोड़ सब्सक्राइबर्स।
- कमांडो एकेडमी चैनल: करीब 27.2 लाख सब्सक्राइबर्स।
इन आंकड़ों के बावजूद सरपंच चुनाव में उन्हें हार मिली। यह नतीजा दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लोकप्रियता और गांव के चुनाव में मतदाताओं का समर्थन अलग-अलग स्थितियां हैं।
पवन साहू की पत्नी और ओमप्रकाश बिश्नोई भी हारे


राजस्थान पंचायत चुनाव में सोशल मीडिया से जुड़े अन्य चर्चित चेहरों को भी झटका लगा है। भीलवाड़ा जिले की फूलियाखुर्द ग्राम पंचायत में फिटनेस इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी कोमल साहू चुनाव हार गईं। उन्हें 277 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहीं। भगवतीलाल सोनी ने 1,203 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।इसी तरह जोधपुर जिले की ओसियां तहसील स्थित इंदों की ढाणी-द्वितीय ग्राम पंचायत से चुनाव लड़ने वाले यूट्यूबर ओमप्रकाश बिश्नोई को केवल 33 वोट मिले। उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 21 लाख से अधिक फॉलोअर्स बताए गए थे। इसके बावजूद वे चुनाव में प्रभावी समर्थन हासिल नहीं कर सके।
सोशल मीडिया की लोकप्रियता और जमीनी राजनीति में अंतर
इन चुनावी नतीजों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग स्थानीय चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त है? पंचायत चुनावों में मतदाता उम्मीदवार के स्थानीय संपर्क, गांव में किए गए काम, व्यक्तिगत संबंधों और समस्याओं के समाधान को भी महत्व देते हैं।सोशल मीडिया किसी व्यक्ति को व्यापक पहचान दिला सकता है, लेकिन चुनाव में हर मतदाता का समर्थन अलग से हासिल करना पड़ता है। विराट चौधरी, कोमल साहू और ओमप्रकाश बिश्नोई के नतीजे इसी अंतर को चर्चा में ला रहे हैं।
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