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नागौर: 15 किलो बारूद बनाने की अनुमति, मौके पर मिला विस्फोटक का जखीरा; उठे निगरानी व्यवस्था पर 5 बड़े सवाल

नागौर के बड़ली क्षेत्र में बारूद गोदाम में हुए तीन धमाकों ने दो परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में दो युवकों की मौके पर मौत हो गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, गोदाम में एक समय में अधिकतम 15 किलो बारूद बनाने की अनुमति थी। लेकिन मौके पर पोटाश, सल्फर और अन्य संदिग्ध विस्फोटक सामग्री के कट्टे मिले हैं। बारूद बनाने के उपकरण और पटाखों का स्टॉक भी बरामद हुआ। अब लाइसेंस, भंडारण क्षमता, सुरक्षा इंतजाम और विभागीय निरीक्षण को लेकर पांच बड़े सवाल उठ रहे हैं।

विस्फोटक सामग्री गिरने से हुआ धमाका
फोटो: STV NEWS RAJASTHAN

मुख्य बातें

  • नागौर गोदाम ब्लास्ट: 15 किलो की अनुमति, मौके पर मिला विस्फोटक का जखीरा
  • 1962 से लाइसेंस, फिर भी सुरक्षा पर सवाल; नागौर हादसे की पूरी कहानी
  • नागौर धमाके के बाद जांच के घेरे में लाइसेंस और प्रशासनिक निगरानी

NAGAUR, 06 NOV. 2026:

तीन धमाकों से दहला बड़ली क्षेत्र, दो युवकों की मौत

नागौर शहर के बड़ली क्षेत्र में गुरुवार सुबह करीब 9:40 बजे बारूद के गोदाम में तीन जोरदार धमाके हुए। विस्फोट इतने तेज थे कि उनकी आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाकों के कारण गोदाम का कमरा पूरी तरह ढह गया। अंदर मौजूद दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। विस्फोट की तीव्रता से दोनों के शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए। घटनास्थल पर शरीर के अंग 15 से 20 फीट दूर तक बिखर गए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने उन्हें एकत्र किया। इस हादसे ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी।

1962 में जारी हुआ था लाइसेंस, तीन पीढ़ियों से चल रहा कारोबार

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शोरगर परिवार को सबसे पहले वर्ष 1962 में लाइसेंस जारी किया गया था। इसके तहत गोदाम में विस्फोटक सामग्री रखने और बारूद तैयार करने की अनुमति मिली थी। बाद में लाइसेंस मोहम्मद उमर के नाम जारी हुआ। वर्ष 2012 में इसे मोहम्मद आमीन शोरगर के नाम हस्तांतरित किया गया। इसके बाद भी लाइसेंस का नवीनीकरण होता रहा। अब हादसे के बाद लाइसेंस जारी करने और रिन्यू करने की प्रक्रिया जांच के दायरे में है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि हर नवीनीकरण के दौरान मौके का निरीक्षण हुआ था या नहीं।

15 किलो बारूद की अनुमति, मौके पर मिले कई उपकरण और रसायन

पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, लाइसेंस में एक समय में अधिकतम 15 किलो बारूद तैयार करने की अनुमति थी। हालांकि, मौके पर मिले सामान के आधार पर निर्धारित क्षमता से अधिक सामग्री रखने की आशंका जताई जा रही है। गोदाम से बारूद पीसने की चक्की और पटाखे बनाने के उपकरण मिले हैं। इसके अलावा पोटाश और सल्फर से भरे कट्टे भी बरामद किए गए। अमोनियम नाइट्रेट जैसा पदार्थ मिलने की जानकारी भी सामने आई है। बरामद सामग्री को जब्त कर जांच के लिए भेजा गया है। अब फोरेंसिक रिपोर्ट से पदार्थों की वास्तविक पहचान और मात्रा स्पष्ट होगी।

गोदाम के पास ही रखा था पटाखों और विस्फोटक सामग्री का स्टॉक

जिस कमरे में धमाका हुआ, वह गैर मुमकिन शोरगर भूमि पर बना था। इसी भूखंड के पश्चिमी हिस्से में टिनशेड के कमरे भी मौजूद थे। इनमें पटाखों और विस्फोटक सामग्री का स्टॉक रखा हुआ था। राहत की बात रही कि आग और धमाके इन कमरों तक नहीं पहुंचे। हालांकि, विस्फोट के कारण आसपास की दीवारों में दरारें आ गईं। घटनास्थल के आसपास घनी आबादी होने से खतरा और गंभीर हो सकता था। यदि आग की चिंगारी दूसरे कमरों तक पहुंच जाती तो जनहानि बढ़ने की आशंका थी। ऐसे में भंडारण की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की जांच जरूरी है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि गोदाम में विस्फोटक सामग्री जमा करने को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं। हालांकि, इन शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है। गोदाम में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन भी नजर नहीं आए। वहां केवल पानी का एक हौद बना हुआ था। हादसे के बाद पुलिस ने एफएसएल टीम को मौके पर बुलाया। टीम ने रसायनों, विस्फोटक सामग्री और अन्य वस्तुओं के नमूने एकत्र किए। पुलिस ने पोटाश और सल्फर जैसे पदार्थों से भरे कट्टों सहित अन्य सामग्री जब्त की है। शिकायतों और सुरक्षा इंतजामों की स्थिति भी जांच का हिस्सा होनी चाहिए।

मृतकों की पहचान हुई, तीसरा युवक धमाके के प्रभाव से अचेत

हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान बाजरवाड़ा निवासी मोहम्मद आमिर (28) पुत्र मोहम्मद आमीन शोरगर और मोहम्मद मुजीब शोरगर (32) पुत्र मोहम्मद अयूब शोरगर के रूप में हुई। दोनों आपस में चचेरे भाई थे। धमाके के समय एक अन्य युवक कुछ सेकंड पहले ही गोदाम से बाहर निकला था। विस्फोट के तेज प्रभाव से वह अचेत होकर गिर गया। धमाकों के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। दो युवकों की मौत से परिवारों में शोक का माहौल है। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

तनावपूर्ण माहौल के बाद पांच लोगों को हिरासत में लिया

हादसे के बाद मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इसी दौरान कुछ लोगों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। इससे वहां तनावपूर्ण स्थिति बन गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठियां फटकारकर लोगों को हटाया। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पार्षद चैनाराम, दरगाह सदर शमशेर सहित पांच लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद माली समाज के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा और उपसभापति शरीफ कुरैशी सहित अन्य लोग कोतवाली थाने पहुंचे। दोनों पक्षों के बीच समझाइश के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ दिया।

शॉर्ट सर्किट या विस्फोटक सामग्री गिरने से हुआ धमाका?

गोदाम में आग लगने और लगातार तीन धमाके होने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। नागौर डीएसपी जतिन जैन के अनुसार, गोदाम के पास बिजली का पोल होने से शॉर्ट सर्किट की आशंका भी जताई जा रही है। वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि अंदर मौजूद युवक के हाथ से विस्फोटक सामग्री गिरने के कारण धमाका हुआ होगा। हालांकि, ये फिलहाल अलग-अलग आशंकाएं हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वास्तविक कारण जांच के बाद ही सामने आएगा। एफएसएल रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य इस जांच में अहम भूमिका निभाएंगे।

ये पांच बड़े सवाल, जिनके जवाब जरूरी

1. लाइसेंस के नवीनीकरण के दौरान निरीक्षण हुआ या नहीं? वर्ष 1962 से जारी लाइसेंस के बाद सुरक्षा मानकों और निर्धारित क्षमता की जांच किसने की?

2. 15 किलो की अनुमति के बावजूद अधिक सामग्री कैसे मिली? क्या गोदाम में निर्धारित सीमा से अधिक बारूद बनाया या संग्रहित किया जा रहा था?

3. स्थानीय शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? लोगों के अनुसार पहले भी शिकायतें की गई थीं। संबंधित विभागों ने उन पर क्या कदम उठाए?

4. आबादी क्षेत्र में सुरक्षा इंतजामों की जांच किसने की? आग बुझाने के संसाधन, आपातकालीन व्यवस्था और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हुआ था या नहीं?

5. लाइसेंस रिन्यू करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा? निरीक्षण के दौरान खामियां सामने क्यों नहीं आईं? यदि निरीक्षण नहीं हुआ तो नवीनीकरण किस आधार पर किया गया?

निगरानी व्यवस्था की जांच भी जरूरी

बड़ली का हादसा केवल विस्फोट के कारणों तक सीमित जांच का विषय नहीं है। इस घटना ने विस्फोटक सामग्री के भंडारण और बारूद निर्माण की निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं। करीब छह दशक से लाइसेंस का नवीनीकरण होता रहा। इस दौरान लाइसेंस अलग-अलग नामों पर हस्तांतरित भी हुआ। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि संबंधित विभागों ने कितनी बार भौतिक निरीक्षण किया। निर्धारित क्षमता और सुरक्षा नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित किया गया? जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि गोदाम में कितनी सामग्री रखी गई थी। साथ ही, यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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