जयपुर में सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन, टेंट हटने के बाद सड़क किनारे खड़े होकर जताया विरोध
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में सोमवार को जयपुर के गांधी सर्किल पर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन द्वारा प्रस्तावित धरने की अनुमति नहीं दिए जाने और टेंट हटाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सड़क किनारे खड़े होकर तख्तियां लहराईं और नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से वांगचुक सहित आंदोलनकारियों से संवाद शुरू करने और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग उठाई।
धरने की अनुमति नहीं मिली, सड़क किनारे हुआ प्रदर्शन
समग्र सेवा संस्थान, गांधी विचार मंच और अन्य सामाजिक संगठनों ने गांधी सर्किल पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक शांतिपूर्ण धरने का कार्यक्रम तय किया था। प्रदर्शन की तैयारियों के तहत लगाए गए टेंट को पुलिस-प्रशासन ने हटवा दिया और धरने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और गांधी सर्किल के बस स्टॉप तथा सड़क किनारे खड़े होकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए।
लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान की उठी मांग
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। उनका कहना था कि किसी भी असहमति का समाधान संवाद के माध्यम से होना चाहिए, न कि प्रशासनिक प्रतिबंधों के जरिए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से अपील की कि आंदोलनकारियों की बात गंभीरता से सुनी जाए और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुरूप बातचीत कर समाधान निकाला जाए।
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सोनम वांगचुक के आंदोलन को बताया जनहित से जुड़ा मुद्दा
समग्र सेवा संस्थान के प्रतिनिधियों ने कहा कि सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े व्यापक मुद्दों को सामने लाता है। उनका कहना था कि ऐसे विषयों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए सरकार को सकारात्मक पहल करनी चाहिए। वक्ताओं ने शांतिपूर्ण आंदोलनों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाने के बजाय संवाद और सहमति के रास्ते को प्राथमिकता देने की बात कही।
गांधीवादी तरीके से समाधान की अपील
गांधी विचार मंच के प्रतिनिधियों ने महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन लोकतंत्र की मजबूत पहचान है। उनका मानना था कि यदि जनआंदोलनों के प्रति संवाद का रास्ता बंद हो जाएगा तो लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने भी पर्यावरण संरक्षण और जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा तथा लोकतांत्रिक संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।
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