पाली फैक्ट्री अग्निकांड: ‘पापा कब आएंगे?’ खुशबू के सवाल ने रुलाया, 4 परिवारों में पसरा मातम
पाली के औद्योगिक क्षेत्र में सारड़ा बायो पॉलीमर्स फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने चार श्रमिकों की जान ले ली। मृतकों में बिहार के गया जिले के रहने वाले नीतीश कुमार, उपेंद्र, राम अवतार चौधरी और विक्की राजवंशी शामिल हैं। हादसे के बाद जब श्रमिकों के शव बिहार ले जाए गए, तो परिवारों में मातम छा गया। वहीं, राम अवतार चौधरी की बेटी खुशबू अब भी पिता के लौटने का इंतजार कर रही है। उसका सवाल, ‘पापा कब आएंगे?’ इस हादसे के दर्द को बयां करता है।
‘पापा कब आएंगे?’ पिता की राह देख रही खुशबू
बिहार के गया जिले के गोगा गांव में खुशबू अपने पिता राम अवतार चौधरी के लौटने का इंतजार कर रही थी। उसे उम्मीद थी कि पिता घर वापस आएंगे और पहले की तरह परिवार के बीच रहेंगे। लेकिन पाली की फैक्ट्री में लगी आग ने उसकी जिंदगी बदल दी।खुशबू से बातचीत के दौरान जब पाली का जिक्र हुआ, तो उसने सबसे पहले पिता के बारे में पूछा। उसने कहा, ‘पापा कब आएंगे?’ वह अपनी भाभी पूजा, बहन पिंकी और मौसी के साथ पिता की राह देख रही थी। जब उसने कहा, ‘हम अनाथ हो गए’, तो उसके दर्द ने हर किसी को भावुक कर दिया।
चार श्रमिकों की मौत से उजड़ गए परिवार
पाली के औद्योगिक क्षेत्र चतुर्थ चरण स्थित सारड़ा बायो पॉलीमर्स फैक्ट्री में 18 अक्टूबर की रात भीषण आग लगी थी। इस हादसे में बिहार के गया जिले के चार श्रमिकों की मौत हो गई।जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार और उपेंद्र की आग में जलने से मौत हो गई थी। वहीं, गंभीर रूप से झुलसे विक्की राजवंशी (21) और राम अवतार चौधरी (56) ने मंगलवार को जोधपुर में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। चारों श्रमिक अपने परिवारों की जरूरतें पूरी करने के लिए काम कर रहे थे। उनकी मौत से परिवारों के सामने भावनात्मक संकट के साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है।
‘पिता को खो दिया, अब मामला दर्ज करवाकर क्या करेंगे’
राम अवतार चौधरी के बेटे शंकर कुमार अपने पिता का शव लेकर बिहार लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री की ओर से परिवार को सात लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। परिजनों को गांव पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी करवाई गई।पिता को खोने का दर्द उनके शब्दों में साफ झलकता है। शंकर ने कहा कि अब पुलिस में मामला दर्ज करवाकर भी क्या करेंगे, क्योंकि वे अपने पिता को खो चुके हैं। परिवार के लिए यह आर्थिक सहायता उस कमी को पूरा नहीं कर सकती, जो राम अवतार की मौत से पैदा हुई है।
रोजी-रोटी के लिए आए थे पाली, पीछे छोड़ गए अधूरे सपने
चारों श्रमिक रोजगार की तलाश में पाली आए थे। वे मेहनत करके अपने परिवार का खर्च चलाना और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाना चाहते थे। लेकिन फैक्ट्री में लगी आग ने उनके सपनों को अधूरा छोड़ दिया।इन श्रमिकों के परिवार अब उस सहारे से वंचित हो गए हैं, जिस पर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी निर्भर थी। हादसे के बाद शवों को बिहार ले जाने की व्यवस्था की गई। नीतीश कुमार और उपेंद्र के शव पाली के बांगड़ अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपे गए। वहीं, विक्की राजवंशी के परिजन गहरे सदमे में थे और उन्होंने बातचीत नहीं की।
एक श्रमिक का उपचार जारी
फैक्ट्री में लगी आग के दौरान कई श्रमिक झुलस गए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, घायल श्रमिक राजेंद्र कुमार का जोधपुर में उपचार जारी है। हादसे में चार लोगों की मौत के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा इंतजामों और आग लगने के कारणों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।हालांकि, आग लगने की वजह और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल इस हादसे का सबसे बड़ा असर उन परिवारों पर पड़ा है, जिन्होंने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए हैं।
परिवारों के लिए कभी न भरने वाला खालीपन
पाली का यह अग्निकांड चार परिवारों के लिए ऐसी त्रासदी बन गया है, जिसका दर्द लंबे समय तक बना रहेगा। गया जिले के गांवों में लौट रहे शव अपने साथ परिवारों की उम्मीदों और सपनों के टूटने की कहानी लेकर जा रहे हैं।खुशबू का अपने पिता को लेकर पूछा गया सवाल इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर है। एक बच्ची अब भी पिता की वापसी की उम्मीद लगाए बैठी है, जबकि परिवार के बाकी सदस्य उस सच्चाई से जूझ रहे हैं, जिसे स्वीकार करना बेहद कठिन है।