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राष्ट्रीय एकता दिवस पर PM मोदी का संबोधन: नक्सलवाद, गरीबी और विपक्ष पर साधा निशाना

एकता नगर (गुजरात)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर गुजरात के एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके बिना आज के एकीकृत भारत की कल्पना करना मुश्किल था। अपने संबोधन में मोदी ने नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई, गरीबी उन्मूलन और विकास योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक मर्यादाओं का पालन नहीं करने और विकास में बाधा डालने का आरोप भी लगाया। प्रधानमंत्री ने ‘दिमागी नक्सलवाद’ को भी देश के लिए चुनौती बताते हुए सतर्क रहने की अपील की।

सरदार पटेल के योगदान को किया याद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने 550 से अधिक रियासतों को एकजुट कर भारत की एकता को मजबूत किया।मोदी ने कहा कि सरदार पटेल के दृढ़ संकल्प और दूरदर्शिता ने देश को एकता के सूत्र में बांधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने राष्ट्रीय एकता दिवस को देश की एकजुटता और विविधता में एकता की भावना को मजबूत करने का अवसर बताया।इस बार समारोह के कार्यक्रम में बदलाव किया गया था। सुबह देशभर में ‘रन फॉर यूनिटी’ आयोजित हुई, जबकि मुख्य एकता परेड शाम को रखी गई।

नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई को बताया बड़ी उपलब्धि

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और देश अब सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ा है।मोदी ने कहा कि हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास की योजनाएं पहुंच रही हैं। उनके मुताबिक, नक्सलवाद से प्रभावित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के प्रयास किए गए हैं।उन्होंने यह भी कहा कि आज देश पहले से ज्यादा सुरक्षित है। ये प्रधानमंत्री के संबोधन में किए गए दावे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की मौजूदा स्थिति और सुरक्षा संबंधी आंकड़ों का आकलन सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।

‘दिमागी नक्सलवाद’ को लेकर भी सतर्क रहने की अपील

प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में सक्रिय सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई के साथ वैचारिक स्तर पर भी सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने ‘दिमागी नक्सलवाद’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह खतरा अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।मोदी ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें देश की एकता को कमजोर करने और समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने नागरिकों से ऐसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।यह टिप्पणी प्रधानमंत्री के राजनीतिक विचारों और सुरक्षा संबंधी दृष्टिकोण का हिस्सा थी। उनके बयान में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सलवाद’ शब्द को लेकर राजनीतिक बहस भी हो सकती है।

गरीबी हटाने के पुराने वादों पर कांग्रेस को घेरा

प्रधानमंत्री ने गरीबी उन्मूलन के मुद्दे पर पिछली सरकारों की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पहले गरीबी हटाने के नाम पर चुनावों में वादे किए जाते थे, लेकिन गरीबों की स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।मोदी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने पिछले 12 वर्षों में गरीब कल्याण पर जोर दिया है। उन्होंने मुफ्त राशन और मुफ्त इलाज जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे गरीब परिवारों के खर्च में बचत हुई है।उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है।

विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देकर गरीबी में कमी का दावा

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट का उल्लेख किया। उनके अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 से पहले के 10 से 12 वर्षों में भारत के करीब 50 करोड़ लोगों ने गरीबी से बाहर निकलने में सफलता हासिल की।उन्होंने यह भी दावा किया कि अत्यधिक गरीबी की स्थिति में रहने वाले लोगों का अनुपात पहले 100 में करीब 27 था, जो घटकर अब 100 में तीन से भी कम रह गया है।ये आंकड़े प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विश्व बैंक की रिपोर्ट के हवाले से रखे। गरीबी के आकलन में इस्तेमाल की गई परिभाषा, समयावधि और मापदंडों को समझने के लिए संबंधित रिपोर्ट का मूल विवरण देखना जरूरी है।

विपक्ष पर संवैधानिक मर्यादाएं तोड़ने का आरोप

प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपना कर्तव्य छोड़कर संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर कर रहा है।मोदी ने कहा कि विपक्ष का विरोध अब कई मामलों में अवरोध का रूप ले चुका है और इससे देश के विकास कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी निभाने की बात कही।ये प्रधानमंत्री की ओर से विपक्ष की कार्यशैली पर की गई राजनीतिक टिप्पणियां हैं। विपक्ष का पक्ष और संबंधित मुद्दों पर उसका जवाब अलग से देखना महत्वपूर्ण होगा।

सुरक्षा बलों की परेड और ‘नक्सल मुक्त भारत’ की प्रस्तुति

राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और विभिन्न राज्यों की पुलिस टुकड़ियों ने हिस्सा लिया। परेड में BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB के जवान शामिल हुए।इस वर्ष की परेड में सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की ओर से ‘नक्सल मुक्त भारत’ विषय पर प्रस्तुति भी तैयार की गई थी। इसमें नक्सल प्रभावित रह चुके 126 जिलों के करीब 2,000 कलाकारों के शामिल होने की जानकारी दी गई।

राष्ट्रीय एकता दिवस का संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सरदार पटेल की विरासत, राष्ट्रीय सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन और विकास योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की एकता बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।एकता नगर में आयोजित समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सुरक्षा बलों की परेड के जरिए राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के भाषण के साथ नक्सलवाद, गरीबी और विपक्ष को लेकर की गई टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बनी रहीं।

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Stv News Rajasthan

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