अलवर के पालना गृह में मिली एक दिन की नवजात, अस्पताल में सुरक्षित भर्ती; डेढ़ महीने में तीसरी घटना ने बढ़ाई चिंता
राजस्थान के अलवर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय के पालना गृह में एक दिन की नवजात बच्ची मिलने से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया। बच्ची को तत्काल राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय में भर्ती कर चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है। चिकित्सकों ने उसे पूरी तरह स्वस्थ बताया है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने नवजात बच्चियों की सुरक्षा और समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पालना गृह में मिली नवजात, अस्पताल प्रशासन ने तुरंत संभाली जिम्मेदारी
अलवर के राजकीय महिला चिकित्सालय परिसर स्थित पालना गृह में एक दिन की नवजात बच्ची मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। बच्ची को सुरक्षित रूप से राजकीय गीतानंद शिशु चिकित्सालय के एफबीएनसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में उसकी देखभाल की जा रही है। प्रारंभिक जांच में बच्ची पूरी तरह स्वस्थ पाई गई है। अस्पताल प्रशासन ने पूरे मामले की सूचना संबंधित विभागों को देते हुए नियमानुसार आगे की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।
स्वास्थ्य सामान्य, बाल कल्याण समिति को सौंपने की होगी प्रक्रिया
गीतानंद शिशु चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. महेश शर्मा के अनुसार नवजात बच्ची का स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण और देखभाल पूरी होने के बाद बच्ची को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द किया जाएगा। इसके बाद समिति निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए बच्ची के संरक्षण, पालन-पोषण और भविष्य की जिम्मेदारी तय करेगी, ताकि उसे सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।
डेढ़ महीने में तीसरी घटना, जिले में बढ़ी चिंता
अलवर जिले में पिछले लगभग डेढ़ महीने के दौरान नवजात बच्चियों के लावारिस मिलने का यह तीसरा मामला सामने आया है। इससे पहले भिवाड़ी क्षेत्र में एक नवजात बच्ची कुएं में मिली थी, जबकि लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र में दूसरी बच्ची कचरे के ढेर के पास पाई गई थी। दोनों मामलों में समय रहते बच्चियों को सुरक्षित बचाकर बाल कल्याण समिति के संरक्षण में सौंप दिया गया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने प्रशासन के साथ-साथ समाज को भी चिंतन करने के लिए मजबूर कर दिया है।
बेटियों के प्रति सोच पर उठे गंभीर सवाल
लगातार नवजात बच्चियों के परित्याग की घटनाएं समाज में बेटियों के प्रति सोच और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, सामाजिक सहयोग और सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना आवश्यक है, ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। फिलहाल अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभाग नियमानुसार सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर रहे हैं तथा बच्ची के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई जारी है।