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नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर 25 पैसे का इनाम: बारां पुलिस की कार्रवाई चर्चा में, जानिए क्या है पूरा मामला

राजस्थान के बारां जिले में नाहरगढ़ वन विभाग कार्यालय में तोड़फोड़ और कर्मचारियों से कथित मारपीट के मामले में पुलिस नरेश मीणा की तलाश कर रही है। इसी बीच उनकी गिरफ्तारी पर 25 पैसे का सांकेतिक इनाम घोषित किए जाने की खबर सामने आई है। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। वहीं, नरेश मीणा ने पहले पुलिस के सामने सरेंडर करने की बात कही थी, लेकिन बाद में न्यायालय की शरण लेने का संकेत दिया।

नरेश मीणा
फोटो: STV NEWS RAJASTHAN

मुख्य बातें

  • नरेश मीणा पर 25 पैसे का इनाम, पुलिस ने क्यों उठाया यह कदम?
  • नरेश मीणा की तलाश में पांच थानों की पुलिस, फार्म हाउस पर छापा
  • चवन्नी का इनाम और लगातार दबिश, बारां पुलिस की कार्रवाई चर्चा में

BARAN, 07 NOV. 2026:

25 पैसे का इनाम क्यों घोषित किया गया?

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा 25 पैसे के इनाम को लेकर हो रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने यह राशि आर्थिक प्रलोभन देकर आरोपी को पकड़वाने के उद्देश्य से नहीं रखी है। इसे प्रतीकात्मक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।रिपोर्टों में पुलिस का पक्ष है कि इतने छोटे इनाम के जरिए आरोपी की सामाजिक और राजनीतिक छवि को कमतर दिखाने का संदेश दिया गया है। यानी पुलिस इस कार्रवाई से यह बताना चाहती है कि किसी व्यक्ति की लोकप्रियता या समर्थकों की संख्या कानून की प्रक्रिया से ऊपर नहीं है। इससे पहले भरतपुर में भी एक वांछित आरोपी पर 25 पैसे का इनाम घोषित किए जाने की खबर सामने आई थी।

पांच थानों की पुलिस तलाश में जुटी, फार्म हाउस पर छापा

नरेश मीणा की गिरफ्तारी के लिए अटरू डीएसपी रामानंद यादव के नेतृत्व में विशेष टीमें बनाई गई हैं। शुक्रवार को पुलिस ने गुंदलाई गांव स्थित एक फार्म हाउस पर दबिश दी। पुलिस के मुताबिक, वहां नरेश मीणा नहीं मिले, लेकिन थार गाड़ी में सवार उनके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया।इस अभियान में छबड़ा, छीपाबड़ौद, अटरू, मोठपुर और कवाई थाना पुलिस की टीमें शामिल रहीं। पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार तलाशी ले रही है। डीएसपी ने आमजन से अपील की है कि नरेश मीणा को शरण न दें और उन्हें कानूनी प्रक्रिया का सामना करने की सलाह दें।

1 नवंबर को नाहरगढ़ वन रेंज कार्यालय में क्या हुआ था?

मामले की शुरुआत 1 नवंबर को हुई थी। वन विभाग ने कथित अवैध ट्यूबवेल से जनरेटर जब्त किया था। इसके विरोध में नरेश मीणा समर्थकों के साथ नाहरगढ़ रेंज कार्यालय पहुंचे थे।वन विभाग की शिकायत के अनुसार, कार्यालय में भीड़ ने कर्मचारियों के साथ मारपीट की। सरकारी दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाया गया और जब्त जनरेटर सहित अन्य सामान ले जाने का आरोप भी लगाया गया। पुलिस ने राजकार्य में बाधा, मारपीट और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। इन आरोपों की जांच जारी है।

पहले सरेंडर का ऐलान, फिर कोर्ट जाने की बात

नरेश मीणा ने पहले 6 नवंबर को शाम 5 बजे नाहरगढ़ थाने पहुंचकर सरेंडर करने की घोषणा की थी। हालांकि, बाद में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना रुख बदलने की जानकारी दी। उन्होंने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के बजाय न्यायालय की शरण लेने की बात कही।इसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश तेज कर दी। 6 नवंबर को फार्म हाउस पर हुई कार्रवाई में दो सहयोगियों की गिरफ्तारी के बावजूद नरेश मीणा पुलिस के हाथ नहीं आए। फिलहाल उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस का तलाशी अभियान जारी है।

नरेश मीणा कौन हैं?

नरेश मीणा राजस्थान की छात्र राजनीति से उभरे नेता हैं। वे राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के महासचिव रह चुके हैं। बाद में उन्होंने विधानसभा चुनावों में भी अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाई और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।नवंबर 2024 में देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान मतदान केंद्र पर तैनात एसडीएम को थप्पड़ मारने की घटना के बाद भी वे चर्चा में आए थे। उस घटना के बाद समरावता में हिंसा हुई थी और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वे बारां जिले के नाहरगढ़ वन विभाग कार्यालय से जुड़े मामले में नामजद आरोपी हैं। इस मामले में उनके खिलाफ लगे आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

पुलिस का पक्ष

पांच थानों की पुलिस तलाश में जुटी,

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