मोरेल बांध पर संकट गहराया: दूषित पानी के खिलाफ किसानों का बड़ा आंदोलन, 1 जुलाई को महापंचायत
दौसा और सवाई माधोपुर जिले में स्थित मोरेल बांध में जयपुर से आने वाले रसायनयुक्त दूषित पानी के कारण गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि अमानीशाह नाले और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला जहरीला पानी बांध में लगातार मिल रहा है, जिससे खेती, पशुधन और स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने 1 जुलाई को मोरेल बांध पर विशाल महापंचायत आयोजित करने का ऐलान किया है। किसानों का कहना है कि यह संघर्ष अब जल, जमीन और भविष्य की सुरक्षा की लड़ाई बन चुका है।
दूषित पानी से मोरेल बांध पर मंडराया संकट
मोरेल बांध, जिसे एशिया के सबसे बड़े कच्चे बांधों में से एक माना जाता है, आज गंभीर प्रदूषण संकट से जूझ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जयपुर के सांगानेर क्षेत्र और अमानीशाह नाले से निकलने वाला औद्योगिक कचरा और रसायनयुक्त पानी ढूंढ नदी के माध्यम से बांध में पहुंच रहा है। लगातार जहरीले पानी के आने से बांध का पूरा जल स्रोत प्रभावित हो चुका है। किसानों का कहना है कि यदि स्थिति पर तुरंत नियंत्रण नहीं पाया गया तो यह जल स्रोत पूरी तरह अनुपयोगी हो सकता है।
किसानों का आंदोलन तेज, 1 जुलाई को महापंचायत का ऐलान
स्थिति से नाराज किसानों और ग्रामीणों ने अब संगठित होकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। शनिवार को भेडोली गांव में हुई आपात बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 जुलाई को मोरेल बांध पर विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें दौसा और सवाई माधोपुर जिलों के सैकड़ों गांवों के हजारों किसान शामिल होंगे। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व और पर्यावरण की रक्षा के लिए है।
खेती, पशुधन और स्वास्थ्य पर गंभीर असर
किसान प्रतिनिधियों और पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है कि दूषित पानी से खेतों की उर्वरा शक्ति तेजी से खत्म हो रही है। फसलें खराब हो रही हैं और सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पानी जहरीला बन चुका है। पशुओं में बीमारियों और अचानक मौतों के मामले भी बढ़ रहे हैं। वहीं, ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि प्रदूषित भूजल के कारण कैंसर, चर्म रोग और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
प्रशासन को ज्ञापन और आगे की रणनीति तय
किसान नेताओं ने बताया कि आंदोलन से पहले प्रशासन को जागरूक करने के लिए 29 जून को लालसोट और बौंली में उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इसके लिए 21 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया है, जो आगे की रणनीति तय करेगी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
मोरेल बांध को लेकर बढ़ती चिंता और जनआंदोलन
मोरेल बांध अब केवल जल स्रोत नहीं बल्कि हजारों गांवों की जीवनरेखा माना जाता है। लगातार बढ़ते प्रदूषण ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई अब आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए है। प्रशासन और सरकार से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि इस ऐतिहासिक जल स्रोत को बचाया जा सके।