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कन्हैयालाल हत्याकांड: राजस्थान हाईकोर्ट से 8 आरोपियों को झटका, आरोप तय करने के आदेश बरकरार

उदयपुर के चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड में राजस्थान हाईकोर्ट ने आठ आरोपियों की अपीलें खारिज कर दी हैं। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने संबंधी आदेशों को बरकरार रखा। अदालत ने UAPA की गंभीर धाराओं सहित अन्य आरोपों पर सुनवाई जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस फैसले में आरोपियों के दोषी या निर्दोष होने पर कोई अंतिम राय नहीं दी गई है।

कन्हैयालाल हत्याकांड
फोटो: STV NEWS RAJASTHAN

मुख्य बातें

  • कन्हैयालाल हत्याकांड में 8 आरोपियों को हाईकोर्ट से झटका
  • UAPA की गंभीर धाराएं बरकरार, एनआईए कोर्ट में जारी रहेगा ट्रायल
  • वीडियो और साजिश पर बचाव पक्ष की दलीलें खारिज, आरोप बरकरार

JAIPUR,06 NOV. 2026:

पांच नवंबर को हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

जयपुर। कन्हैयालाल हत्याकांड में आरोपियों को राजस्थान हाईकोर्ट से कानूनी झटका लगा है। अदालत ने आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेशों को चुनौती देने वाली दोनों अपीलें खारिज कर दीं। यह फैसला पांच नवंबर 2026 को सुनाया गया। मुख्य न्यायाधीश संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने विशेष एनआईए अदालत के 12 जनवरी और 13 फरवरी 2024 के आदेशों को बरकरार रखा। इन आदेशों के तहत आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई के लिए आरोप तय किए गए थे।

आठ आरोपियों के खिलाफ अपीलें खारिज

हाईकोर्ट में आठ आरोपियों की ओर से आरोप तय करने के आदेशों को चुनौती दी गई थी। इनमें मोहम्मद रियाज अत्तारी, मोहम्मद गौस, मोहसीन खान, आसिफ हुसैन, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली, मोहम्मद जावेद खान और मुस्लिम खान शामिल हैं। अदालत ने दोनों अपीलें खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेशों में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अब इन आरोपियों के खिलाफ विशेष एनआईए अदालत में मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी।

UAPA की धारा 16, 18 और 20 के आरोप बरकरार

हाईकोर्ट के फैसले के बाद आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की तीन महत्वपूर्ण धाराओं के तहत मुकदमा जारी रहेगा। इनमें धारा 16 आतंकवादी कृत्य, धारा 18 आतंकवादी कृत्य की साजिश और धारा 20 आतंकवादी गिरोह या संगठन की सदस्यता से संबंधित है। इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत भी आरोप तय किए गए हैं। इनमें हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर अपराधों से संबंधित धाराएं शामिल हैं।

साजिश के लिए प्रत्यक्ष सबूत जरूरी नहीं: हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के शुरुआती चरण में दोष या निर्दोष होने का अंतिम फैसला नहीं किया जाता। इस स्तर पर यह देखा जाता है कि उपलब्ध सामग्री से प्रथम दृष्टया मामला बनता है या गंभीर संदेह पैदा होता है। अदालत ने कहा कि आपराधिक साजिश का प्रत्यक्ष या प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य नहीं होना अपने आप में आरोपियों को राहत देने का आधार नहीं है। परिस्थितियों के सामूहिक प्रभाव से भी साजिश का अनुमान लगाया जा सकता है।

वीडियो और आतंकी संगठन से जुड़ाव पर बचाव पक्ष की दलीलें

बचाव पक्ष ने बरामद वीडियो की सामग्री और प्रतिबंधित संगठन से सीधे जुड़ाव नहीं होने जैसे तर्क रखे थे। हाईकोर्ट ने इन्हें आरोपों से मुक्त करने के लिए निर्णायक आधार नहीं माना। अदालत के अनुसार, इन पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन मुकदमे की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। आरोप तय करने के चरण में सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच कर मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता।

ट्रायल कोर्ट स्वतंत्र रूप से साक्ष्यों का मूल्यांकन करेगी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि अपीलों पर सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियां मुकदमे के अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेंगी। विशेष एनआईए अदालत गवाहों और पेश किए जाने वाले साक्ष्यों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन करेगी। यानी हाईकोर्ट के इस आदेश को आरोपियों की दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। अब कन्हैयालाल हत्याकांड का ट्रायल तय कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगा।

पुलिस का पक्ष

पांच नवंबर को हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

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