राजस्थान के 20 जिलों में ढाई साल से बंद मोबाइल जल परीक्षण लैब, 200 संविदाकर्मी हुए बेरोजगार
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पेयजल की गुणवत्ता जांचने वाली सचल जल परीक्षण प्रयोगशालाओं (मोबाइल लैब) की सुविधा करीब ढाई साल से बंद है। चार संभागों के 20 जिलों में संचालित यह व्यवस्था गांवों और ढाणियों तक पहुंचकर पानी की मौके पर जांच करती थी। करीब सात साल तक इस व्यवस्था से ग्रामीण जलस्रोतों की गुणवत्ता पर निगरानी रखी गई। लेकिन दोबारा टेंडर नहीं होने से मोबाइल लैब का संचालन बंद हो गया। इसका असर पेयजल जांच व्यवस्था पर पड़ रहा है। वहीं, करीब 200 संविदाकर्मी भी बेरोजगार हो गए हैं।

मुख्य बातें
- राजस्थान के 20 जिलों में ढाई साल से बंद मोबाइल जल परीक्षण लैब
- दूषित पानी की जांच में देरी की आशंका, मोबाइल लैब शुरू करने की मांग
- गांवों में मौके पर पानी की जांच बंद, कब शुरू होंगी मोबाइल लैब?
SIROHI, 05 NOV. 2026:
टेंडर नहीं होने से बंद हुई मोबाइल जल परीक्षण प्रयोगशालाएं
प्रदेश के गांवों और ढाणियों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मोबाइल जल परीक्षण प्रयोगशालाएं शुरू की गई थीं। इन प्रयोगशालाओं के जरिए टीम सीधे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचती थी। वहां हैंडपंप, ट्यूबवेल, पानी की टंकियों और अन्य जलस्रोतों से पानी की जांच की जाती थी।यह व्यवस्था करीब सात साल तक संचालित रही। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी करना आसान हुआ। लेकिन निर्धारित अवधि के बाद दोबारा टेंडर नहीं होने से मोबाइल लैब का संचालन बंद हो गया। अब करीब ढाई साल से इन वाहनों के पहिए थमे हुए हैं।
चार संभागों के 20 जिलों में मिलती थी सुविधा
मोबाइल लैब की सुविधा प्रदेश के चार संभागों के 20 जिलों में उपलब्ध थी। इसके तहत जोधपुर, उदयपुर, अजमेर और कोटा संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों को शामिल किया गया था।
जोधपुर संभाग: जालोर, बाड़मेर, जैसलमेर, सिरोही, पाली और जोधपुर।
उदयपुर संभाग: उदयपुर, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद।
अजमेर संभाग: अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक और नागौर।
कोटा संभाग: कोटा, बारां, झालावाड़ और बूंदी।
इन जिलों में मोबाइल लैब के माध्यम से गांवों और ढाणियों तक पहुंचकर पेयजल स्रोतों की जांच की जाती थी।
अब एएनएम के जिम्मे पानी के नमूने जुटाने की जिम्मेदारी
मोबाइल लैब बंद होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों से नमूने एकत्र करने की जिम्मेदारी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की एएनएम संभाल रही हैं। वे हैंडपंप, ट्यूबवेल, पानी की टंकियों और अन्य स्रोतों से पानी के नमूने लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में भेजती हैं।हालांकि, इस प्रक्रिया में नमूनों को प्रयोगशाला तक पहुंचाने और जांच रिपोर्ट मिलने में समय लगता है। पहले मोबाइल लैब मौके पर ही जांच कर परिणाम उपलब्ध करा देती थी। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था में दूषित पानी की पहचान और आवश्यक कार्रवाई में देरी की आशंका बनी रहती है।
मौके पर होती थी जीवाणु और रासायनिक जांच
मोबाइल जल परीक्षण प्रयोगशालाओं की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि पानी की गुणवत्ता की जांच गांव में ही हो जाती थी। इन लैब में जलस्रोतों के पानी का जीवाणु और रासायनिक परीक्षण किया जाता था। जांच रिपोर्ट तत्काल जलदाय विभाग के मुख्यालय भेजी जाती थी।यदि किसी जलस्रोत के पानी में अशुद्धियां मिलती थीं तो विभाग बिना देरी आवश्यक उपचारात्मक कदम उठा सकता था। अब यह व्यवस्था बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता की निगरानी प्रभावित होने की आशंका है। खासकर दूरस्थ गांवों और ढाणियों में समय पर जांच की जरूरत अधिक महसूस की जा रही है।
करीब 200 संविदाकर्मी हुए बेरोजगार
मोबाइल लैब के संचालन के लिए विभिन्न जिलों में संविदा पर कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। लेकिन टेंडर प्रक्रिया दोबारा नहीं होने से प्रयोगशालाओं का संचालन बंद हो गया। इसके चलते करीब 200 संविदाकर्मियों का रोजगार भी प्रभावित हुआ है।सात साल तक ग्रामीण क्षेत्रों में जल परीक्षण का काम करने वाली यह व्यवस्था अब दोबारा शुरू होने का इंतजार कर रही है। मोबाइल लैब के संचालन से न केवल पानी की जांच में तेजी आती थी, बल्कि स्थानीय स्तर पर दूषित जलस्रोतों की पहचान भी संभव होती थी।
दोबारा संचालन के लिए नहीं मिले दिशा-निर्देश
सिरोही के जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता भोमाराम के अनुसार, सचल जल परीक्षण प्रयोगशालाओं की सुविधा करीब ढाई साल से बंद है। इसे दोबारा शुरू करने के संबंध में अभी तक दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।उन्होंने बताया कि वर्तमान में एएनएम गांवों से पानी के नमूने लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजती हैं। ऐसे में मोबाइल लैब की सुविधा दोबारा शुरू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल गुणवत्ता की जांच को गति मिल सकती है।
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