जेडी वेंस का पाकिस्तान पर निशाना, बोले- प्रेस की आजादी की कमी से रुका था ईरान-अमेरिका MoUv
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान खुद को अहम मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है, लेकिन इसी बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणी ने इस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेंस ने कहा कि समझौते का आधिकारिक दस्तावेज जारी होने में देरी की एक बड़ी वजह पाकिस्तान और कतर में प्रेस की सीमित स्वतंत्रता रही।
समझौते के दस्तावेज में देरी पर उठे सवाल
अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते की घोषणा के बाद उसका पूरा आधिकारिक पाठ कुछ दिनों बाद सार्वजनिक किया गया। इस देरी को लेकर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक पॉडकास्ट में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका समझौते की जानकारी जल्द सार्वजनिक करना चाहता था, लेकिन मध्यस्थ देशों की व्यवस्था और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों के कारण इसमें समय लगा। वेंस के मुताबिक, पाकिस्तान और कतर में प्रेस की स्वतंत्रता अमेरिका जैसी नहीं है, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हुई।
प्रेस फ्रीडम को लेकर पाकिस्तान पर टिप्पणी
जेडी वेंस ने अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन यानी ‘फर्स्ट अमेंडमेंट’ का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका में अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। उनके अनुसार, इसी वजह से अमेरिकी नागरिक किसी भी सरकारी दस्तावेज की जांच और विश्लेषण कर सकते हैं। वेंस का कहना था कि पाकिस्तान और कतर में ऐसी व्यवस्था नहीं होने के कारण पारदर्शिता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी।
आलोचनाओं के बीच जारी हुआ समझौते का पूरा पाठ
ईरान और अमेरिका के बीच समझौते के आधिकारिक दस्तावेज को लेकर पहले से ही कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ आलोचकों का आरोप था कि समझौते के विवरण सार्वजनिक करने में देरी इसलिए की गई क्योंकि इसमें ईरान को कई महत्वपूर्ण रियायतें दी गई थीं। बाद में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी के बाद समझौते का पूरा पाठ जारी किया गया, जिसके बाद इस पर व्यापक चर्चा शुरू हुई।
पाकिस्तान में फिर चर्चा में आया प्रेस फ्रीडम का मुद्दा
वेंस की टिप्पणी के बाद पाकिस्तान में प्रेस की स्वतंत्रता का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी पाकिस्तान को पत्रकारों के लिए चुनौतीपूर्ण देशों में गिना जाता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते को कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के लिए इस तरह की टिप्पणियां असहज स्थिति पैदा कर सकती हैं।
कूटनीतिक उपलब्धि के बीच बढ़ी मुश्किलें
पाकिस्तान की सरकार और सैन्य नेतृत्व इस समझौते को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रहे थे। हालांकि, जेडी वेंस के बयान के बाद यह बहस तेज हो गई है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी मध्यस्थ देश की विश्वसनीयता में पारदर्शिता और प्रेस की स्वतंत्रता की क्या भूमिका होती है। इससे पाकिस्तान को अपनी छवि को लेकर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।