पिता ने बेटे को बेचे प्लॉट, बाद में पोते के नाम कर दिए दान; मामला पहुंचा कोर्ट
अलवर शहर के यादव कृषि फार्म क्षेत्र में पारिवारिक जमीन विवाद का मामला न्यायालय तक पहुंच गया है। एक व्यक्ति ने अपने पिता और भतीजे पर आरोप लगाया है कि पहले जिन दो प्लॉटों को बेचकर उसका कब्जा दे दिया गया था, बाद में उन्हीं संपत्तियों के दान पत्र पोते के नाम पंजीकृत करा दिए गए। मामले में कोर्ट से एफआईआर दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
वर्ष 2018 में प्लॉट बेचने का दावा
परिवादी हरमिन्दर सिंह ने न्यायालय में दायर शिकायत में बताया कि उनके पिता हरपाल सिंह ने 28 फरवरी 2018 को खसरा नंबर 193 स्थित दो प्लॉट उन्हें छह लाख रुपये में बेचे थे। इस संबंध में दोनों पक्षों के बीच इकरारनामा भी किया गया था और प्लॉटों का कब्जा भी उन्हें सौंप दिया गया था। शिकायत के अनुसार दस्तावेज नोटरी से प्रमाणित हैं तथा उनमें गवाहों के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।
बाद में पोते के नाम कराए दान पत्र
हरमिन्दर सिंह का आरोप है कि बिक्री के बाद 31 जुलाई 2019 को उनके पिता ने उन्हीं प्लॉटों को अलग-अलग खसरा नंबर और बदले हुए विवरण के साथ अपने पोते पुनीत यादव के नाम दान पत्र के जरिए पंजीकृत करा दिया। उनका कहना है कि जमीन का वास्तविक विवरण बदलकर दर्ज किया गया ताकि पहले हुए सौदे की जानकारी छिपाई जा सके और भविष्य में जमीन पर दावा किया जा सके।
मिलीभगत का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि हरपाल सिंह और पुनीत यादव ने आपसी सहमति और मिलीभगत से यह पूरा कार्य किया। परिवादी का कहना है कि परिवार के सभी सदस्यों को जानकारी थी कि संबंधित प्लॉट पहले ही उन्हें बेचे जा चुके हैं, इसके बावजूद दान पत्र तैयार कराए गए। इसी आधार पर उन्होंने धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेरफेर की आशंका जताई है।
पुलिस से शिकायत के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
हरमिन्दर सिंह के अनुसार उन्होंने पहले स्थानीय पुलिस को शिकायत दी थी। बाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में परिवाद दायर कर मामले की जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
न्यायालय में विचाराधीन है मामला
मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। परिवादी ने अदालत से दस्तावेजों की जांच कर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। वहीं आरोपों को लेकर दूसरे पक्ष की ओर से अभी सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अदालत के निर्देशों के बाद ही मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।