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Iran-US Peace Deal के बाद भी होगी स्विट्जरलैंड बैठक, स्विस सरकार बोली- तय कार्यक्रम के अनुसार सभी पक्ष मिलेंगे

ईरान और अमेरिका के बीच 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद यह माना जा रहा था कि स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित बैठक रद्द हो सकती है। हालांकि स्विस सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि तय कार्यक्रम के अनुसार सभी पक्ष शुक्रवार को बर्गनस्टॉक में मिलेंगे और समझौते के क्रियान्वयन को लेकर शुरुआती चर्चा करेंगे।

समझौते के बावजूद जारी रहेगा कूटनीतिक संवाद

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर आधिकारिक मुहर लगने के बाद भी दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में निर्धारित बैठक में शामिल होंगे। स्विस विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि बर्गनस्टॉक में प्रस्तावित बैठक को रद्द नहीं किया गया है और सभी संबंधित पक्ष पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक मौजूद रहेंगे।

पाकिस्तान और कतर समेत मध्यस्थ देशों की भी होगी भागीदारी

स्विस सरकार के अनुसार इस बैठक में अमेरिका और ईरान के अलावा मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान और कतर सहित अन्य संबंधित देशों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल ही में हुए समझौते को लागू करने की प्रक्रिया और आगे की रणनीति पर प्रारंभिक चर्चा करना होगा।

हस्ताक्षर पहले होने से उठे थे बैठक रद्द होने के कयास

शुरुआती योजना के अनुसार शांति समझौते पर हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक के दौरान किए जाने थे। लेकिन दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा पहले ही समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए जाने के बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि अब इस बैठक की आवश्यकता नहीं रह गई है। ईरान की ओर से भी ऐसे संकेत दिए गए थे, जिससे कयास और तेज हो गए थे।

फिलहाल जारी नहीं हुआ विस्तृत कार्यक्रम

स्विस विदेश मंत्रालय ने अभी बैठक के विस्तृत एजेंडे या समय-सारिणी की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। माना जा रहा है कि यह बैठक औपचारिक होने के साथ-साथ समझौते के क्रियान्वयन के लिए आगे की प्रक्रिया तय करने का मंच भी बनेगी।

ट्रंप ने ईरानी संपत्तियां लौटाने के फैसले का किया बचाव

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस उपलब्ध कराने के फैसले का समर्थन किया। उनका कहना है कि किसी दूसरे देश की संपत्तियों को अनिश्चितकाल तक रोके रखना वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और अमेरिकी डॉलर पर भरोसे को कमजोर कर सकता है। ट्रंप के अनुसार, यह धन मूल रूप से ईरान का है और उचित प्रक्रिया के तहत उसे लौटाया जाना चाहिए।

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