धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान कृष्ण पर दिए बयान को बताया चूक, हाथ जोड़कर दी सफाई
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण को लेकर दिए अपने बयान पर सफाई दी है। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने कहा कि कथा के दौरान भाव और विनोद में कुछ बातें कह दी थीं। उनका उद्देश्य भगवान कृष्ण का अपमान करना नहीं था। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए थी। इस दौरान वह हाथ जोड़कर अपनी बात रखते नजर आए। उन्होंने लोगों से अपने बयान का गलत अर्थ नहीं निकालने की अपील भी की।

मुख्य बातें
- भगवान कृष्ण पर टिप्पणी के बाद धीरेंद्र शास्त्री की सफाई, बोले- हमसे चूक हो गई
- राम-कृष्ण की तुलना पर विवाद, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने जोड़े हाथ
- कथा में कही बात पर विवाद, धीरेंद्र शास्त्री ने बताया अपना आशय
NEW DELHI, 03 NOV. 2026:
भगवान राम और कृष्ण की तुलना वाले बयान पर हुआ विवाद
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक कथा के दौरान भगवान राम और भगवान कृष्ण के नामों की तुलना करते हुए कुछ टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कहा था कि राम का नाम सीधा है, जबकि कृष्ण का नाम टेढ़ा है। इसी क्रम में उन्होंने अयोध्या और वृंदावन के नामों का भी उदाहरण दिया। उन्होंने धनुष और बांसुरी को लेकर एक गीत की पंक्तियां भी सुनाईं। इन टिप्पणियों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान पर आपत्ति जताई।
बोले- भाव में कह दिया, लेकिन ऐसा विचार नहीं था
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि कई बार विनोद या भावावेश में ऐसी बातें निकल जाती हैं, जिनका अर्थ अलग निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कृष्ण जी को टेढ़ा और राम जी को सीधा कहने वाली बात भाव में कही थी। उनका आशय अपमान करना नहीं था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था। शास्त्री ने अपनी बात रखते हुए लोगों से बयान का अनर्थ नहीं निकालने की अपील की।
'हम खुद ठाकुर जी के भक्त हैं'
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान कृष्ण के प्रति उनकी श्रद्धा है। उन्होंने अपने नाम में भी कृष्ण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह ठाकुर जी के भक्त हैं। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि कभी-कभी जिस आराध्य के प्रति गहरा प्रेम होता है, उसके संदर्भ में भी भावपूर्ण या विनोदपूर्ण बातें कही जाती हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी टिप्पणी को उचित ठहराने के बजाय इसे अपनी चूक बताया। हाथ जोड़कर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि उनकी भावना भगवान कृष्ण के विरोध की नहीं थी।
सूरदास और गोपियों के प्रसंग का दिया उदाहरण
अपनी सफाई में शास्त्री ने महाकवि सूरदास और भ्रमर गीत के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भक्ति साहित्य में गोपियों के संवादों में भी विनोद और भावपूर्ण अभिव्यक्तियां मिलती हैं। उनके अनुसार, ऐसे प्रसंगों को भाव के संदर्भ में समझना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल प्रसिद्धि पाने के लिए उनका विरोध किया जाता है। यह उनकी अपनी प्रतिक्रिया थी। वहीं, विवाद की वजह बनी मूल टिप्पणी को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
बयान पर सफाई के बाद फिर चर्चा में मामला
भगवान राम और कृष्ण से जुड़ी टिप्पणी के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सफाई भी चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर उन्होंने अपनी बात को भाव में हुई चूक बताया। दूसरी ओर, धार्मिक विषयों पर सार्वजनिक मंच से बोलते समय शब्दों के चयन को लेकर बहस जारी है। इस घटनाक्रम में मूल बयान और बाद में दी गई सफाई, दोनों महत्वपूर्ण हैं। पूरे मामले को समझने के लिए दोनों वक्तव्यों का संदर्भ देखना जरूरी है।
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