ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ी वैश्विक चिंता, IAEA बोला- अब गतिविधियों की पूरी जानकारी नहीं
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताएं उभर आई हैं। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA ने स्वीकार किया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद उसे ईरान की परमाणु गतिविधियों की पहले जैसी निगरानी नहीं मिल पा रही है। एजेंसी का कहना है कि कई परमाणु स्थलों तक उसकी पहुंच बंद है, जिससे कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति का स्वतंत्र सत्यापन फिलहाल संभव नहीं हो पा रहा। इस बीच सैटेलाइट तस्वीरों ने भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
IAEA ने जताई निगरानी क्षमता घटने की चिंता
संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने सुरक्षा परिषद के समक्ष बताया कि हालिया सैन्य हमलों के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी में गंभीर बाधाएं आई हैं। एजेंसी के अनुसार वह अब पहले की तरह परमाणु स्थलों का निरीक्षण नहीं कर पा रही है और कई गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि भी संभव नहीं है। इससे वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। IAEA का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उसके पास ईरान के परमाणु कार्यक्रम की संपूर्ण और अद्यतन तस्वीर उपलब्ध नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र ने कूटनीतिक समाधान पर दिया जोर
संयुक्त राष्ट्र में राजनीतिक एवं शांति-निर्माण मामलों की अंडर-सेक्रेटरी रोजमेरी डिकार्लो ने सुरक्षा परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि परमाणु मुद्दे का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। उन्होंने महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सभी पक्षों को रचनात्मक और सद्भावनापूर्ण वार्ता जारी रखनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी प्रकार का स्थायी समाधान अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 के उद्देश्यों के अनुरूप होना चाहिए।
परमाणु स्थलों तक नहीं पहुंच पा रही एजेंसी
IAEA के अनुसार, परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत जिन निरीक्षणों की व्यवस्था थी, वे हालिया घटनाक्रम के बाद प्रभावित हुई हैं। एजेंसी का कहना है कि उसे कई महीनों से ईरान की ओर से परमाणु कार्यक्रम संबंधी पर्याप्त जानकारी नहीं मिली है और न ही निरीक्षकों को प्रमुख परमाणु स्थलों तक नियमित पहुंच मिल सकी है। ऐसे में यूरेनियम संवर्धन, सेंट्रीफ्यूज संचालन और अन्य गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल संभव नहीं है।
हमलों से परमाणु ढांचे को नुकसान की आशंका
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हालिया हमलों से ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा हो सकता है। इसमें सेंट्रीफ्यूज, भारी पानी से जुड़ी सुविधाएं और यूरेनियम अयस्क प्रसंस्करण से संबंधित इकाइयां शामिल हो सकती हैं। हालांकि इन क्षतियों का स्वतंत्र और प्रत्यक्ष सत्यापन अभी तक नहीं हो पाया है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय वास्तविक स्थिति को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।
सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ाए नए सवाल
इस बीच कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में जारी सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया गया है कि तेहरान के दक्षिण-पूर्व स्थित पारचिन सैन्य परिसर के भीतर कुछ निर्माण गतिविधियां फिर से दिखाई दे रही हैं। इन तस्वीरों को लेकर यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि संबंधित परिसर में परमाणु अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियां दोबारा शुरू हो सकती हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इस विषय पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
वैश्विक सुरक्षा के लिए बढ़ी चिंता
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक IAEA को पूर्ण निरीक्षण और सत्यापन की अनुमति नहीं मिलती, तब तक कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति को लेकर संदेह बना रहेगा। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र लगातार सभी संबंधित पक्षों से तनाव कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अपील कर रहा है, ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा पर किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके।