PoK में बढ़ा सियासी संकट, JAAC का पाकिस्तान को अल्टीमेटम; 15 जुलाई को ‘आजादी’ के ऐलान की चेतावनी
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में राजनीतिक और जनआंदोलन तेज हो गया है। जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने अपनी मांगें पूरी नहीं होने पर 15 जुलाई को पाकिस्तान से अलग होने का ऐलान करने की चेतावनी दी है। बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बीच इलाके में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, जिससे हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
15 जुलाई की चेतावनी से बढ़ी पाकिस्तान की चिंता
PoK में JAAC के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। संगठन का कहना है कि यदि उसकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 15 जुलाई को पाकिस्तान से अलग होने की घोषणा की जाएगी। प्रदर्शनकारी इसे स्थानीय लोगों के अधिकारों और राजनीतिक स्वायत्तता की लड़ाई बता रहे हैं। वहीं प्रशासन हालात पर कड़ी निगरानी रखे हुए है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहा है।
रावलकोट और मुजफ्फराबाद में तेज हुआ विरोध प्रदर्शन
रावलकोट, मुजफ्फराबाद, पुंछ और अब्बासपुर समेत कई इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने ईदगाह मैदान सहित विभिन्न स्थानों पर धरना शुरू किया है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी मुजफ्फराबाद की ओर एक बड़े मार्च की भी तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की है, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
38 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार पर दबाव
JAAC ने सरकार के सामने 38 सूत्रीय मांगों का प्रस्ताव रखा है। इनमें महंगाई पर नियंत्रण, सस्ती बिजली, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार और आर्थिक नीतियों में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र के संसाधनों का पर्याप्त लाभ स्थानीय जनता को नहीं मिल रहा, जबकि सरकार का कहना है कि सभी मुद्दों पर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।
आरक्षित विधानसभा सीटों का विवाद भी बना बड़ा मुद्दा
आंदोलन का एक प्रमुख कारण शरणार्थियों के लिए आरक्षित विधानसभा की 12 सीटों को लेकर विवाद भी है। JAAC का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए किया जाता है। दूसरी ओर, PoK की अदालत पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि ये सीटें संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इन्हें हटाने के लिए कानूनी संशोधन आवश्यक होगा। इस मुद्दे ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।
तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था सख्त
हाल के दिनों में प्रदर्शन के दौरान हिंसा और झड़पों की घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, जबकि प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का दावा कर रहे हैं। क्षेत्र की स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।