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श्रीगंगानगर घटना पर भड़के हनुमान बेनीवाल, सख्त कानून और त्वरित न्याय की उठाई मांग

श्रीगंगानगर केस पर बेनीवाल बोले- चौराहे पर फांसी दो

श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और उत्पीड़न के मामले को लेकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सांसद हनुमान बेनीवाल ने राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और पीड़िता के समुचित इलाज व पुनर्वास की मांग की। साथ ही उन्होंने ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए कानून को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता भी जताई।

घटना पर जताया आक्रोश, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल

सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक मासूम बच्ची के साथ हुई कथित हैवानियत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते पुलिस और स्थानीय प्रशासन सतर्क रहता तो संभवतः ऐसी घटना को रोका जा सकता था। बेनीवाल ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और ऐसी घटनाएं कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती को सामने लाती हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

प्रशासन की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

हनुमान बेनीवाल ने कहा कि केवल मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही अथवा मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिस स्थान पर यह कथित अपराध हुआ, वहां निगरानी व्यवस्था और नियमित जांच क्यों प्रभावी नहीं रही। उनके अनुसार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करना भी उतना ही आवश्यक है जितना अपराधियों को सजा दिलाना।

पीड़िता के इलाज और पुनर्वास की उठाई मांग

आरएलपी सांसद ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं का असर केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी पीड़ित पर लंबे समय तक रहता है। इसलिए राज्य सरकार को पीड़िता के संपूर्ण उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श, शिक्षा और भविष्य के पुनर्वास की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध करानी चाहिए ताकि बच्ची सामान्य जीवन की ओर लौट सके। साथ ही उन्होंने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कर जल्द न्याय सुनिश्चित करने की मांग भी दोहराई।

सख्त कानून की पैरवी, कठोर सजा की मांग

बेनीवाल ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कानून को और अधिक कठोर बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पहले भी वे संसद और सार्वजनिक मंचों पर इस विषय को उठा चुके हैं। उनका मानना है कि ऐसे अपराधों में त्वरित जांच, समयबद्ध सुनवाई और कठोर दंड से ही समाज में कानून का भय पैदा होगा। हालांकि उन्होंने अपराधियों के लिए कड़ी सजा की मांग की, लेकिन किसी भी दंड का अंतिम निर्णय भारतीय न्यायिक प्रक्रिया और लागू कानूनों के तहत ही होगा।

मामले पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज

इस घटना के बाद प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विभिन्न संगठनों और सामाजिक समूहों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने बच्ची को जल्द न्याय दिलाने और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों तथा न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर तय होगी। वहीं, यह मामला एक बार फिर महिला सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और अपराध नियंत्रण को लेकर व्यापक बहस का विषय बन गया है।

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