भारत-जापान के संयुक्त बयान से पाकिस्तान असहज, पूर्व उच्चायुक्त बोले- यह भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत
भारत और जापान के 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान ने पाकिस्तान की कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आतंकवाद और पहलगाम हमले का उल्लेख किए जाने पर पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने नाराजगी जताई और इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया। वहीं, चीन ने भी भारत-जापान सहयोग पर प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की बात कही।
संयुक्त बयान में आतंकवाद पर सख्त रुख, पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
भारत और जापान के बीच नई दिल्ली में आयोजित 16वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान ने पाकिस्तान में राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने की जरूरत दोहराई। इस बयान को भारत की मजबूत कूटनीतिक रणनीति का परिणाम माना जा रहा है, क्योंकि इसमें सीमा पार आतंकवाद को लेकर स्पष्ट संदेश दिया गया है। इससे पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
अब्दुल बासित ने जताई नाराजगी, कहा- जापान से जवाब मांगे पाकिस्तान
भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त और जर्मनी में पूर्व राजदूत रह चुके अब्दुल बासित ने संयुक्त बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि भारत पहले भी विभिन्न देशों के साथ जारी संयुक्त बयानों में सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाता रहा है, लेकिन इस बार जापान का इस तरह का रुख पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है। बासित ने दावा किया कि बयान में पहलगाम हमले और पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद का उल्लेख इस्लामाबाद के लिए कूटनीतिक झटका है। उन्होंने सुझाव दिया कि पाकिस्तान को जापान से इस मुद्दे पर औपचारिक स्पष्टीकरण मांगना चाहिए।
पहलगाम हमला और TRF का उल्लेख बना चर्चा का केंद्र
भारत और जापान के साझा बयान में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा करते हुए ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का भी उल्लेख किया गया। दोनों देशों ने आतंकवाद के किसी भी स्वरूप को अस्वीकार्य बताते हुए दोषियों और उनके समर्थकों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी प्रमुख एशियाई साझेदार द्वारा इस तरह का स्पष्ट संदेश भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने का संकेत है।
भारत-जापान साझेदारी को नई मजबूती, कई अहम समझौतों पर सहमति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच हुई वार्ता में रक्षा, आर्थिक सहयोग, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, आपूर्ति शृंखला और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों देशों ने मुक्त और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
चीन की प्रतिक्रिया, क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की दी सलाह
भारत-जापान शिखर वार्ता के बाद चीन ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि किसी भी दो देशों के बीच सहयोग का उद्देश्य किसी तीसरे देश को निशाना बनाना या उसके हितों को नुकसान पहुंचाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सहयोग ऐसा होना चाहिए जिससे विश्वास बढ़े और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और शांति कायम रहे। माना जा रहा है कि भारत-जापान के बीच रणनीतिक सहयोग और महत्वपूर्ण खनिजों पर बढ़ती साझेदारी को चीन गंभीरता से देख रहा है।
बदलते एशियाई समीकरणों में भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। जापान जैसे प्रमुख रणनीतिक साझेदार के साथ आतंकवाद, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर स्पष्ट सहमति इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पाकिस्तान की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि संयुक्त बयान को वहां गंभीरता से लिया जा रहा है। वहीं, चीन की सावधानी भरी टिप्पणी यह दर्शाती है कि एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरणों पर सभी प्रमुख देशों की नजर बनी हुई है।