नवजात की मौत पर परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए आरोप
अलवर। राजकीय महिला चिकित्सालय में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। गोविंदगढ़ निवासी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के बाद 11 अगस्त को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई दिनों तक प्रसव नहीं होने के बाद 17 अगस्त को जांच में गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं मिली। सोनोग्राफी में शिशु की मौत की पुष्टि होने पर परिजनों ने डॉक्टरों पर समय रहते उपचार और ऑपरेशन नहीं करने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा कर दिया।
गोविंदगढ़ कस्बे में सीताराम मंदिर के समीप रहने वाले विशाल ने बताया कि वह अपनी पत्नी संतोष को 11 अगस्त को प्रसव पीड़ा होने पर राजकीय महिला चिकित्सालय लेकर आया था। परिजनों के अनुसार, डॉक्टरों ने शुरुआत में 13 अगस्त को प्रसव की संभावित तारीख बताई और सामान्य प्रसव की बात कहते हुए दवाइयां दीं।
विशाल का आरोप है कि बाद में संतोष की प्रसव पीड़ा बंद हो गई, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टरों ने उन्हें यह कहकर आश्वस्त किया कि जब तक दर्द नहीं हो रहा, तब तक ऑपरेशन की जरूरत नहीं है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार डॉक्टरों से आग्रह किया कि यदि ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित प्रसव संभव है तो सर्जरी कर दी जाए, लेकिन 13, 14 और 15 अगस्त को भी प्रसव को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
परिजनों के मुताबिक, 14 अगस्त को संतोष को हल्का बुखार भी आया था, जो बाद में ठीक हो गया। इसके बावजूद 16 अगस्त तक प्रसव को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया। रविवार 17 अगस्त को डॉक्टरों ने जब महिला की जांच की तो गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं मिली। इसके बाद सोनोग्राफी कराई गई, जिसमें शिशु की मौत की पुष्टि हुई।
यह जानकारी मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने डॉक्टरों पर समय रहते इलाज नहीं करने तथा ऑपरेशन नहीं करने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन अजन्मे बच्चे की मौत से दुखी परिवार का आक्रोश शांत नहीं हुआ।
अस्पताल प्रशासन ने कहा- जांच के बाद ही स्पष्ट होगी लापरवाही
राजकीय महिला चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. टेकचंद ने बताया कि संतोष पत्नी विशाल को 11 अगस्त को प्रसव पीड़ा के दौरान अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि महिला को टाइफाइड की शिकायत थी और उसका रक्तचाप भी बढ़ा हुआ था। उनके अनुसार, महिला के ऑपरेशन की तैयारी की जा रही थी।
डॉ. टेकचंद ने बताया कि रविवार को ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने महिला की जांच की तो बच्चे की धड़कन नहीं मिली। इसके बाद सोनोग्राफी कराई गई, जिसमें गर्भस्थ शिशु को मृत पाया गया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही हुई है या नहीं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल महिला का ऑपरेशन कर मृत शिशु को बाहर निकाला जाएगा। महिला की स्थिति सामान्य होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दी जाएगी।