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ग्वालियर एलिवेटेड रोड परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 289 मकान-दुकान हटेंगे, 63 करोड़ मुआवजा तय

ग्वालियर शहर की महत्वाकांक्षी स्वर्णरेखा एलिवेटेड रोड परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। परियोजना के दूसरे चरण में बिजली लाइनों और ट्रांसफार्मरों की शिफ्टिंग का कार्य तेज़ी से चल रहा है, जबकि प्रभावित मकानों और दुकानों पर लाल निशान लगाए जा चुके हैं। प्रशासन के अनुसार परियोजना की जद में आने वाले 289 मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हटाए जाएंगे, जिसके लिए करीब 63 करोड़ रुपये का मुआवजा निर्धारित किया गया है। यह परियोजना पूरी होने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली मानी जा रही है।

बिजली शिफ्टिंग और सीमांकन का काम अंतिम चरण में

एलिवेटेड रोड निर्माण में सबसे बड़ी बाधा माने जा रहे बिजली ढांचे को हटाने और स्थानांतरित करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। सात भाई की गोठ, टापू मोहल्ला, नई सड़क, कमानी पुल, जीवाजीगंज और आसपास के क्षेत्रों में नए बिजली खंभे लगाए जा रहे हैं। साथ ही ट्रांसफार्मर और विद्युत लाइनों की शिफ्टिंग भी लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। जिन भवनों और दुकानों पर परियोजना का प्रभाव पड़ना है, उनका सीमांकन कर लाल निशान लगाए गए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

289 संपत्तियां होंगी प्रभावित, 63 करोड़ मुआवजा निर्धारित

भू-अर्जन शाखा के अनुसार परियोजना के लिए कुल 289 निजी कब्जों को हटाना आवश्यक होगा। प्रभावित लोगों को मुआवजा देने के लिए लगभग 63 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। प्रशासन का दावा है कि अधिकांश भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और केवल कुछ मामलों का निस्तारण शेष है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा ताकि परियोजना कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए।

अतिक्रमण और जलभराव बने बड़ी चुनौती

गिरवाई पुलिस चौकी से फूलबाग तक करीब 7.42 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मार्ग पर कई स्थानों पर अतिक्रमण मौजूद है। इसके अलावा कुछ हिस्सों में जलभराव की समस्या भी निर्माण कार्य को प्रभावित कर रही है। प्रशासन का मानना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही जलनिकासी व्यवस्था को भी बेहतर बनाया जाएगा ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जा सके।

926 करोड़ की लागत से बन रही प्रदेश की पहली एलिवेटेड रोड

करीब 926.21 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना मध्यप्रदेश की पहली बड़ी शहरी एलिवेटेड रोड परियोजना मानी जा रही है। इसका निर्माण कार्य जून 2024 में शुरू हुआ था और नवंबर 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना का निर्माण पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों को जोड़ने वाली यह सड़क भविष्य में यातायात दबाव कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।

14 एंट्री-एग्जिट पॉइंट से मिलेगा बेहतर कनेक्टिविटी नेटवर्क

एलिवेटेड रोड पर शहर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए कुल 14 लूप और एंट्री-एग्जिट पॉइंट बनाए जा रहे हैं। इससे वाहन चालकों को अलग-अलग क्षेत्रों से सीधे एलिवेटेड कॉरिडोर तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी। प्रशासन का दावा है कि यह व्यवस्था यातायात को अधिक व्यवस्थित बनाएगी और शहर के भीतरी मार्गों पर वाहनों का दबाव कम करेगी।

ट्रैफिक जाम से राहत और समय की होगी बचत

परियोजना पूरी होने के बाद मुरैना, शिवपुरी और झांसी की दिशा में जाने वाले वाहनों को शहर के अंदरूनी हिस्सों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। वाहन जलालपुर तिराहा से सीधे एलिवेटेड रोड पर चढ़कर गिरवाई की ओर बढ़ सकेंगे। इससे शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम में कमी आएगी। अनुमान है कि यात्रियों का लगभग एक घंटे तक का यात्रा समय बच सकेगा और ईंधन की खपत भी कम होगी।

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