फ्लाईदुबई कांड के बाद सुरक्षा पर सवाल, ओमानी पायलटों की एंट्री को लेकर बड़ा खुलासा
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में हुए हमले ने इजरायल की विमानन सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्लाइट FZ1073 में भारतीय कैप्टन स्मित माछर पर उनके ओमानी को-पायलट ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया था। घटना के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में आपात स्थिति में उतारना पड़ा। अब इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि जिन देशों के साथ इजरायल के राजनयिक संबंध नहीं हैं, वहां के पायलटों को लेकर लागू सुरक्षा नियमों की निगरानी में गंभीर चूक हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कई ओमानी पायलट इजरायल के लिए उड़ान भरते रहे।
दुश्मन देश के पायलटों पर क्या है नियम?
इजरायल में कुछ ऐसे देशों के नागरिकों को लेकर विशेष सुरक्षा प्रावधान हैं, जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन देशों के पायलटों को इजरायल जाने वाली उड़ानों में तैनात नहीं किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य संवेदनशील विमानन मार्गों और कॉकपिट तक पहुंच रखने वाले लोगों की सुरक्षा जांच को मजबूत रखना है। लेकिन फ्लाईदुबई घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि इन नियमों की वास्तविक निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी। इजरायली मीडिया ने इस व्यवस्था में संभावित लापरवाही की ओर संकेत किया है।
दर्जनों ओमानी पायलटों के उड़ान भरने का दावा
इजरायली चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में कई ओमानी पायलटों ने तेल अवीव जाने वाली उड़ानों में काम किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों की ओर से विदेशी एयरलाइनों पर यह जिम्मेदारी छोड़ दी गई थी कि वे प्रतिबंधित देशों के पायलटों को इजरायल जाने वाली उड़ानों में तैनात न करें। अब फ्लाईदुबई मामले के बाद इसी व्यवस्था की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों पर विस्तृत आधिकारिक जांच रिपोर्ट अभी सामने आना बाकी है।
शिन बेट की भूमिका पर भी उठे सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स में इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शिन बेट ने फ्लाईदुबई के पायलटों की व्यक्तिगत पृष्ठभूमि की जांच नहीं की थी। इसके बजाय एयरलाइन को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था। यानी विदेशी एयरलाइन को यह सुनिश्चित करना था कि प्रतिबंधित देशों के नागरिक पायलट के तौर पर इजरायल जाने वाली उड़ान में तैनात न हों। अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसी व्यवस्था को बनाया जा सकता है।
एविएशन सिक्योरिटी ऑपरेशन्स सेंटर की होगी जांच
फ्लाईदुबई घटना के बाद इजरायल के परिवहन मंत्रालय की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा किए जाने की बात कही जा रही है। खास तौर पर सेंटर फॉर एविएशन सिक्योरिटी ऑपरेशन्स की भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है। यह व्यवस्था इजरायल आने वाली उड़ानों के क्रू और सुरक्षा प्रक्रियाओं की निगरानी से जुड़ी है। जांच में यह देखा जा सकता है कि विदेशी एयरलाइनों के पायलटों से जुड़े सुरक्षा नियमों की निगरानी कैसे की जाती थी और संबंधित एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
हवा में पायलट पर हुआ था चाकू से हमला
फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को उस समय संकट पैदा हुआ, जब कथित तौर पर को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित माछर पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में माछर गंभीर रूप से घायल हुए। घटना के दौरान विमान की उड़ान भी प्रभावित हुई और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आपात प्रक्रिया अपनाई गई। विमान को सऊदी अरब के तबुक में उतारा गया। रिपोर्टों के अनुसार, विमान में करीब 174 से 180 लोग सवार थे। यात्रियों और चालक दल की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया।
स्मित माछर की बहादुरी की हो रही चर्चा
घटना के बाद भारतीय पायलट स्मित माछर की भूमिका की चर्चा भारत और इजरायल दोनों जगह हुई। गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने विमान को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई। यात्रियों और अन्य क्रू सदस्यों ने भी संकट की स्थिति में मदद की। घटना के बाद भारतीय अधिकारियों और इजरायल में भारतीय समुदाय की ओर से माछर के साहस की सराहना की गई। उनकी तबीयत को लेकर भी लगातार जानकारी सामने आती रही है।
अब सुरक्षा व्यवस्था की होगी समीक्षा
फ्लाईदुबई कांड ने सिर्फ कॉकपिट सुरक्षा ही नहीं, बल्कि विदेशी एयरलाइनों के क्रू की स्क्रीनिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि ओमानी नागरिक को-पायलट के रूप में इजरायल जाने वाली उड़ान में कैसे तैनात हुआ। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइन के बीच जिम्मेदारी तय करने वाली व्यवस्था की भी समीक्षा हो सकती है। यदि नियमों की निगरानी में कोई चूक सामने आती है, तो भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव किए जा सकते हैं।