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“इस जंगल में हम दो शेर…” अलवर में एक ही पार्टी के दो पावर सेंटर? वायरल वीडियो से 2028 की सियासी चर्चा

अलवर की राजनीति में एक तस्वीर फिर चर्चा में है।लेकिन इस बार तस्वीर के साथ एक वीडियो भी है।और दोनों को जोड़कर सियासी गलियारों में कई सवाल उठ रहे हैं।एक तरफ राजस्थान सरकार में मंत्री और अलवर शहर से विधायक संजय शर्मा हैं। दूसरी तरफ पूर्व सभापति अजय अग्रवाल हैं। अजय अग्रवाल की पत्नी सुमनलता अग्रवाल अब अलवर नगर निगम की पहली महापौर हैं। 21 सितंबर को हुए चुनाव में सुमनलता को 42 वोट मिले थे। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश शर्मा को 23 वोटों से हराया था।यानी अलवर की राजनीति में अब एक तरफ विधानसभा और सरकार की ताकत है। दूसरी तरफ नगर निगम की सत्ता से जुड़ा अग्रवाल परिवार है। इसी बीच 2 अक्टूबर को सामने आए एक वीडियो ने दोनों नेताओं के बीच तालमेल को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

गांधी जयंती का कुछ सेकेंड का वीडियो और बड़ा सियासी सवाल

2 अक्टूबर को अलवर नगर निगम में गांधी जयंती का कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में वन मंत्री संजय शर्मा पहुंचे। उन्होंने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वह अपनी गाड़ी की ओर बढ़े और वहां से रवाना हो गए।वीडियो में पीछे से महापौर सुमनलता अग्रवाल के पति अजय अग्रवाल को आवाज लगाते हुए देखा जा सकता है। लेकिन संजय शर्मा नहीं रुके और गाड़ी में बैठकर निकल गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।कुछ सेकेंड के इस वीडियो ने अलवर की स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया।

वीडियो के बाद अलग-अलग वजहों की चर्चा

वीडियो सामने आने के बाद इसके पीछे की वजह को लेकर अलग-अलग चर्चाएं सामने आने लगीं।कुछ चर्चाओं में निगम से जुड़े मुद्दों का जिक्र किया गया। कुछ लोगों ने सफाई कर्मचारियों और अनुकंपा नियुक्तियों से जुड़े मामलों को इससे जोड़कर देखा। वहीं कुछ चर्चाएं निगम कार्यक्रम के समय और दूसरे स्थानीय राजनीतिक मुद्दों से जुड़ी रहीं।एक चर्चा यह भी रही कि अजय अग्रवाल द्वारा मीडिया में खुद को लेकर दिए गए बयानों से भी दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ी हो सकती है।हालांकि इन सभी बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो से सिर्फ इतना सामने आता है कि अजय अग्रवाल मंत्री को आवाज लगाते नजर आए और मंत्री कार्यक्रम के बाद वहां से रवाना हो गए।

अजय अग्रवाल की सफाई ने तस्वीर को दूसरा एंगल दिया

वीडियो के बाद अजय अग्रवाल की ओर से भी सफाई सामने आई।अजय अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने कार्यक्रम को लेकर एक दिन पहले मंत्री संजय शर्मा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की थी। उनका कहना है कि फोन पर बातचीत नहीं हो सकी।अजय अग्रवाल के मुताबिक संभव है कि मंत्री के पास कोई जरूरी काम रहा हो। इसी वजह से वह कार्यक्रम के बाद जल्दबाजी में निकल गए हों।यानी अजय अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को किसी विवाद से जोड़ने से इनकार करते हुए इसे जल्दबाजी में हुए घटनाक्रम के तौर पर बताया।

सवाल सिर्फ वीडियो का नहीं, बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी है

लेकिन अलवर की राजनीति में चर्चा सिर्फ इस वीडियो तक सीमित नहीं है।क्योंकि पिछले कुछ दिनों में नगर निगम की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। सुमनलता अग्रवाल अलवर नगर निगम की पहली महापौर बनी हैं। नगर निगम के 65 सदस्यीय सदन में भाजपा के पास 28 पार्षद थे। सुमनलता को चुनाव में 42 वोट मिले। यानी भाजपा के अलावा निर्दलीय पार्षदों का भी बड़ा समर्थन उन्हें मिला।सुमनलता के पति अजय अग्रवाल पूर्व सभापति रह चुके हैं। महापौर चुनाव से पहले भी उनकी पत्नी की दावेदारी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं थीं।ऐसे में नगर निगम में अग्रवाल परिवार की राजनीतिक भूमिका अब पहले से ज्यादा चर्चा में है।

एक तरफ नगर निगम, दूसरी तरफ विधानसभा और सरकार

दूसरी तरफ संजय शर्मा अलवर शहर विधानसभा सीट से दो बार विधायक हैं और राज्य सरकार में मंत्री हैं।यही वजह है कि अलवर की स्थानीय राजनीति को देखने वाले लोग अब दोनों राजनीतिक केंद्रों की भूमिका पर नजर रख रहे हैं।एक तरफ नगर निगम की सत्ता है।दूसरी तरफ विधानसभा और राज्य सरकार में मंत्री पद है।यहीं से अलवर में दो अलग-अलग राजनीतिक प्रभाव केंद्रों की चर्चा शुरू होती है।हालांकि इसे भाजपा के भीतर किसी औपचारिक टकराव के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। दोनों नेताओं के बीच मतभेद या राजनीतिक दूरी को लेकर भी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

“इस जंगल में हम दो शेर…” वाली पोस्ट फिर क्यों याद आई?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया पर पुरानी पोस्ट भी चर्चा में आ गई।“इस जंगल में हम दो शेर…” वाली लाइन के साथ अजय अग्रवाल और संजय शर्मा की तस्वीर से जुड़ी पोस्ट पहले भी चर्चा में रही थी। आपके दिए विवरण के मुताबिक यह पोस्ट 14 जुलाई 2025 को अजय अग्रवाल के पेज से पोस्ट की गई थी।अब गांधी जयंती के वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोग उस पुरानी पोस्ट को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं।लेकिन एक पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट और एक मौजूदा वीडियो के आधार पर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव का निष्कर्ष निकालना फिलहाल उचित नहीं होगा।

अजय अग्रवाल का राजनीतिक सफर भी रहा चर्चा में

अजय अग्रवाल की राजनीति भी पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में रही है।2023 के विधानसभा चुनाव में वह अलवर शहर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रहे थे। जुलाई 2025 में कांग्रेस ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी ने उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की प्रशंसा करने को कार्रवाई का कारण बताया था।इसके बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं।अब उनकी पत्नी के अलवर नगर निगम की पहली महापौर बनने के बाद अजय अग्रवाल फिर स्थानीय राजनीति के केंद्र में नजर आ रहे हैं।

क्या 2028 में विधानसभा की राजनीति में भी दिखेगा असर?

यहीं से चर्चा 2028 के विधानसभा चुनाव तक पहुंचती है।क्या अजय अग्रवाल आने वाले समय में विधानसभा की राजनीति में अपनी भूमिका तलाशेंगे?क्या नगर निगम में उनकी पत्नी की मौजूदगी उनके राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाएगी?क्या भविष्य में उनके नाम को विधानसभा टिकट की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जाएगा?या फिर यह सब सिर्फ स्थानीय राजनीतिक अटकलें हैं?इन सवालों का जवाब अभी किसी के पास नहीं है। फिलहाल 2028 के टिकट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा या फैसला सामने नहीं आया है।इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को भविष्य की टिकट राजनीति से जोड़ना अभी सिर्फ राजनीतिक चर्चा के स्तर पर ही है।

सफाई कर्मचारियों का मुद्दा भी क्यों महत्वपूर्ण है?

अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का मुद्दा पिछले कुछ समय से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है।अगस्त 2026 में नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका के तबादले को लेकर भी मीडिया रिपोर्टों में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति विवाद का जिक्र हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्री संजय शर्मा की नाराजगी के बाद नरूका का तबादला हुआ था। हालांकि उस पूरे प्रकरण और मौजूदा वायरल वीडियो के बीच सीधा संबंध आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है।यही वजह है कि वीडियो के बाद इस मुद्दे का नाम चर्चाओं में जरूर आया, लेकिन इसे घटना की वजह मानना फिलहाल सही नहीं होगा।

मेयर पद संभालने के दौरान भी साथ नजर आए थे दोनों

एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि 25 सितंबर के आसपास सुमनलता अग्रवाल ने नगर निगम में महापौर के तौर पर कार्यभार संभाला था। उस दौरान मंत्री संजय शर्मा भी नगर निगम पहुंचे थे। यानी हालिया घटनाक्रम से पहले दोनों पक्ष एक ही कार्यक्रम में साथ नजर आए थे।यह तथ्य भी इस बात की ओर इशारा करता है कि सिर्फ एक वायरल वीडियो के आधार पर रिश्तों या राजनीतिक समीकरणों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।

अब नजर आगे के राजनीतिक घटनाक्रम पर

अलवर की राजनीति में फिलहाल तस्वीर काफी दिलचस्प है।नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल महापौर हैं। उनके पति अजय अग्रवाल का स्थानीय राजनीति में पुराना अनुभव है। दूसरी तरफ संजय शर्मा अलवर शहर के विधायक होने के साथ राज्य सरकार में मंत्री हैं।दोनों की राजनीतिक भूमिकाएं अलग-अलग हैं। लेकिन शहर की राजनीति में दोनों के प्रभाव का क्षेत्र कहीं न कहीं एक-दूसरे से जुड़ता है।इसी वजह से आने वाले समय में दोनों के बीच सार्वजनिक तालमेल, निगम से जुड़े मुद्दों और संगठनात्मक गतिविधियों पर राजनीतिक नजर बनी रहेगी।

एक वीडियो से शुरू हुई 2028 की चर्चा

फिलहाल मामला एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ है।वीडियो कुछ सेकेंड का है।लेकिन उसके राजनीतिक मायने कई तरह से निकाले जा रहे हैं।एक तरफ अजय अग्रवाल की सफाई है। दूसरी तरफ वीडियो में दिखाई देने वाला घटनाक्रम है। इनके बीच सोशल मीडिया की चर्चाएं हैं।और इन्हीं चर्चाओं ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अलवर भाजपा की स्थानीय राजनीति में आने वाले समय में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं?इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है।

अलवर में अब सवाल “दो शेर” का नहीं, तालमेल का है

“इस जंगल में हम दो शेर…” वाली पुरानी लाइन अब एक बार फिर चर्चा में है।लेकिन राजनीति में तस्वीरों और वीडियो से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है संगठन, नेतृत्व, पद और राजनीतिक भूमिका।अलवर में फिलहाल एक तरफ नगर निगम की सत्ता है और दूसरी तरफ विधानसभा के साथ राज्य सरकार में मंत्री पद।क्या दोनों राजनीतिक केंद्रों के बीच तालमेल बना रहेगा?क्या आने वाले दिनों में दूरी कम होगी या बढ़ेगी?क्या 2028 की विधानसभा राजनीति तक इसका कोई असर पहुंचेगा?इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं।लेकिन इतना जरूर है कि अलवर की राजनीति में एक छोटा सा वायरल वीडियो अब बड़ी सियासी चर्चा का कारण बन चुका है।

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Stv News Rajasthan

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