ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विरोध में किसानों का आंदोलन तेज, सरकार से वार्ता नहीं हुई तो 16 अगस्त से जयपुर में अनशन
किशनगढ़-कोटपूतली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना के विरोध में किसान महापंचायत ने आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया है। किसानों का कहना है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर बातचीत शुरू नहीं करती है, तो 16 अगस्त से जयपुर में धरना और क्रमिक अनशन शुरू किया जाएगा। इसके बाद 25 अगस्त को बड़े प्रदर्शन की भी घोषणा की गई है। आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए प्रभावित गांवों में जनसंपर्क अभियान भी चलाया जाएगा।
सरकार को दी वार्ता की चेतावनी, 16 अगस्त से धरना का ऐलान
तातेड़ा में किसान महापंचायत की बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति तय की गई। बैठक में किसानों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार वार्ता के लिए आगे नहीं आती, तो 16 अगस्त से जयपुर में क्रमिक अनशन और धरना शुरू किया जाएगा। साथ ही 25 अगस्त को बड़े स्तर पर प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। हालांकि प्रदर्शन का स्थान अभी तय नहीं किया गया है। किसान नेताओं ने कहा कि इसकी घोषणा जयपुर में धरना शुरू होने के बाद की जाएगी।
301 ट्रैक्टरों की रैली का किया गया उल्लेख
बैठक में किसान महापंचायत के पदाधिकारियों ने 27 जुलाई को आयोजित ट्रैक्टर रैली की समीक्षा भी की। संगठन के अनुसार इस रैली में कुल 301 ट्रैक्टर शामिल हुए थे। चौमू, गुडलिया, भूतेड़ा, आष्टी कला, नांगल, रायसिंहकाबास, सिंगोद, ढोढसर, सरगोठ, किशनगढ़, फुलेरा, रेनवाल, कोटपूतली और नीमकाथाना सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे थे। किसान नेताओं ने इसे आंदोलन को मिल रहे व्यापक समर्थन का संकेत बताया और कहा कि आने वाले कार्यक्रमों में इससे भी अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
प्रभावित 114 गांवों में संगठन मजबूत करने की तैयारी
किसान महापंचायत ने आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विस्तृत रणनीति बनाई है। अलग-अलग तहसीलों के लिए प्रभारी नियुक्त किए गए हैं, जो प्रभावित 114 गांवों में जाकर किसानों से संपर्क करेंगे। बैठक में निर्णय लिया गया कि 14 अगस्त से पहले ग्राम इकाइयों का गठन किया जाएगा और किसानों से संकल्प पत्र भरवाए जाएंगे। जिन स्थानों पर परियोजना के लिए भूमि चिन्हित की गई है, वहां प्रतीकात्मक रूप से लाल झंडे लगाने का भी निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही आंदोलन के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने का अभियान भी चलाया जाएगा।
आंदोलन की निगरानी के लिए बनाई गई विशेष टीम
आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए किसान महापंचायत ने अलग-अलग जिम्मेदारियां भी तय की हैं। ज्ञानचंद मीणा, बत्ती लाल बैरवा और भगवान निठारवाल को कार्यक्रमों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि आंदोलन के समन्वय का दायित्व सुंदरलाल भंवरिया को दिया गया है। बैठक में विभिन्न जिलों और तहसीलों के किसान प्रतिनिधियों ने भाग लिया और चरणबद्ध आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार से सकारात्मक वार्ता नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।