अलवर मेयर चुनाव: रिंकल गर्ग ने नाम वापस लिया, अब BJP-कांग्रेस में सीधा मुकाबला
अलवर नगर निगम मेयर चुनाव की तस्वीर नाम वापसी के बाद साफ हो गई है। निर्दलीय प्रत्याशी रिंकल गर्ग ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद अब मेयर पद के लिए भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। भाजपा ने वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की ओर से वार्ड 39 की पार्षद कमलेश शर्मा प्रत्याशी हैं। अलवर नगर निगम में मेयर का चुनाव 21 सितंबर को होगा। दोनों दलों के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। ऐसे में निर्दलीय और बसपा पार्षदों का समर्थन चुनावी गणित में महत्वपूर्ण रहेगा।
नाम वापसी के बाद दो प्रत्याशी मैदान में
नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद मेयर चुनाव में अब दो प्रत्याशी रह गए हैं। भाजपा की सुमनलता अग्रवाल और कांग्रेस की कमलेश शर्मा के बीच मुकाबला होगा।
वार्ड 36 की पार्षद रिंकल गर्ग ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। शुक्रवार को नाम वापस लेने के बाद उनका नाम चुनावी मुकाबले से बाहर हो गया।
भाजपा ने सुमनलता अग्रवाल को बनाया प्रत्याशी
भाजपा की ओर से वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल मेयर पद की प्रत्याशी हैं। नाम वापसी के बाद भाजपा अब अपने पार्षदों के साथ अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाने की कोशिश करेगी।
अलवर नगर निगम के चुनाव परिणाम में भाजपा को 28 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 33 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में भाजपा को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए पांच और पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होगी।
कांग्रेस की कमलेश शर्मा मैदान में
कांग्रेस ने वार्ड 39 की पार्षद कमलेश शर्मा को मेयर पद का प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस के पास नगर निगम में 23 पार्षद हैं।
बहुमत के लिए कांग्रेस को 10 अतिरिक्त पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसे में कांग्रेस के लिए निर्दलीय और बसपा पार्षदों से समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण होगा।
अलवर नगर निगम में क्या है पूरा गणित?
अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम के अनुसार भाजपा के 28, कांग्रेस के 23 और 13 निर्दलीय पार्षद हैं। इसके अलावा एक बसपा पार्षद भी निर्वाचित हुआ है।
मेयर चुनाव में 33 पार्षदों का समर्थन बहुमत के लिए जरूरी है। दोनों प्रमुख दल इस आंकड़े से नीचे हैं। इसलिए मतदान से पहले पार्षदों का समर्थन चुनाव का अहम हिस्सा बन गया है।
निर्दलीय और बसपा पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण
रिंकल गर्ग के नाम वापसी के बाद अब 13 निर्दलीय और एक बसपा पार्षद का वोट महत्वपूर्ण हो गया है। भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए पांच अतिरिक्त समर्थन चाहिए, जबकि कांग्रेस को 10 की जरूरत है।
ऐसे में दोनों दल इन पार्षदों से संपर्क कर सकते हैं। हालांकि मतदान के दौरान वास्तविक समर्थन किस प्रत्याशी को मिलता है, यह 21 सितंबर को होने वाले चुनाव में ही स्पष्ट होगा।
दोनों दलों में बैठकों और संपर्कों का दौर
मेयर चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने पार्षदों के साथ बैठकें कर रहे हैं। दोनों दलों का फोकस अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ अतिरिक्त समर्थन जुटाने पर रहेगा।
नाम वापसी के बाद मुकाबला दो प्रत्याशियों तक सीमित होने से अब राजनीतिक गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। मतदान से पहले पार्षदों के समर्थन को लेकर दोनों खेमों की रणनीति पर नजर रहेगी।
21 सितंबर को होगा मेयर का चुनाव
अलवर नगर निगम के मेयर पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होगा। इसी दिन पार्षद अपने मत का इस्तेमाल कर मेयर का चुनाव करेंगे।
अब चुनाव का पूरा गणित भाजपा और कांग्रेस के पास मौजूद पार्षदों के अलावा निर्दलीय और बसपा पार्षदों के रुख पर निर्भर करेगा। मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलवर नगर निगम की मेयर की कुर्सी किस प्रत्याशी के पास जाती है।