NEET विवाद: इस्तीफे के बाद छलका धर्मेंद्र प्रधान का दर्द, बोले– ‘जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को किया गुमराह’
NEET परीक्षा विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है। अपने इस्तीफे के पत्र में निवर्तमान मंत्री ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए खुलासा किया कि वे पिछले 10 दिनों से अत्यंत व्यथित थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर आसीन व्यक्तियों ने राजनीतिक लाभ के लिए परीक्षार्थियों को गुमराह करने और सुधार प्रक्रिया में बाधाएं खड़ी करने का प्रयास किया।
10 दिनों से व्यथित था मन: धर्मेंद्र प्रधान ने व्यक्त की अपनी नैतिक पीड़ा
अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने खुलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि NEET परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं और उसके बाद की परिस्थितियों से वे बेहद आहत थे। पिछले 10 दिनों की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों का असमंजस में होना उनके लिए व्यक्तिगत रूप से पीड़ादायक था। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सार्वजनिक प्रतिनिधि होने के नाते उन्होंने हमेशा युवाओं की न्यायसंगत मांगों और भावनाओं को प्राथमिकता दी है, और इसी नैतिक जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
चार दशकों का समर्पण: शिक्षा सुधारों को बताया मजबूत राष्ट्र की नींव
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने चार दशक लंबे सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए शिक्षा क्षेत्र के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। उन्होंने लिखा कि पिछले 40 से अधिक वर्षों से वे छात्रों, शिक्षकों के अधिकारों और शैक्षणिक सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं। उनका अटूट विश्वास है कि एक समावेशी, सशक्त और दूरदर्शी शिक्षा प्रणाली ही एक विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकती है। युवाओं को देश का असली शिल्पकार बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि एक गहरा नैतिक संकल्प है।
ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों पर आरोप: छात्रों को भटकाने का हुआ प्रयास
पत्र के एक महत्वपूर्ण अंश में निवर्तमान मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुछ प्रमुख व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब सरकार पूरी निष्ठा के साथ परीक्षा की शुचिता बहाल करने और निष्पक्ष जांच कराने में जुटी थी, तब जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने विद्यार्थियों को भड़काने और गुमराह करने का काम किया। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि इस तरह के प्रयासों से न केवल सुधार की गति धीमी हुई, बल्कि मेधावी छात्रों के मन में भ्रम और असुरक्षा का माहौल भी पैदा किया गया।
प्रधानमंत्री का जताया आभार: राष्ट्र और युवाओं की सेवा का दोहराया संकल्प
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बनकर देश की सेवा करना उनके लिए गर्व का विषय रहा। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा मिले मार्गदर्शन और समर्थन के लिए गहरा आभार प्रकट किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही वे मंत्री पद से त्यागपत्र दे रहे हों, लेकिन युवाओं के कल्याण, शिक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और राष्ट्र निर्माण के कार्यों के प्रति उनका समर्पण भविष्य में भी इसी तरह बना रहेगा।