NEET विवाद: ‘निडर रहोगे तो किसी का भी इस्तीफा ले लेंगे’, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले CJP प्रमुख अभिजीत दीपके
NEET-UG परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके का एक और आक्रामक बयान सामने आया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए दीपके ने कहा कि यह इस्तीफा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि नागरिक बिना डरे सरकार के समक्ष अपनी न्यायसंगत मांगें रखते हैं, तो व्यवस्था को झुकना ही पड़ता है।
अभिजीत दीपके का बड़ा दावा: ‘बिना डरे आवाज उठाने पर हर मांग पूरी होगी’
जंतर-मंतर पर मौजूद अभ्यर्थियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने इस त्यागपत्र को युवाओं के अटूट हौसले का परिणाम बताया। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का सबूत है कि यदि आप डरेंगे नहीं और अन्याय के आगे झुकेंगे नहीं, तो हम किसी का भी इस्तीफा ले सकते हैं।” उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि वे भविष्य में भी अपने अधिकारों और प्रणालीगत सुधारों के लिए बिना किसी भय के आवाज उठाते रहें।
जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल, ढोल-नगाड़ों के साथ मनाया गया विजयोत्सव
शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने की खबर और अभिजीत दीपके के संबोधन के बाद जंतर-मंतर पर माहौल पूरी तरह बदल गया। पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और नारेबाजी के साथ इस फैसले का स्वागत किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह निर्णय देश के लाखों मेधावी विद्यार्थियों के सत्याग्रह की जीत है। आंदोलन स्थल पर चारों तरफ उत्साह का माहौल देखा गया और इसे छात्र शक्ति की ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
‘इस्तीफा सिर्फ शुरुआत’: CJP ने रणनीति आगे भी जारी रखने के दिए संकेत
यद्यपि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आंदोलन की प्रमुख मांग थी, किंतु CJP नेतृत्व ने साफ किया है कि संघर्ष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस्तीफा प्रक्रियात्मक सुधारों की दिशा में पहला कदम है। NEET-UG परीक्षा में प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए उचित मुआवजे और विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुए मामलों तथा पुलिस कार्रवाई की समीक्षा जैसी अन्य मांगों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक वे छात्रों के हितों की रक्षा के लिए तत्पर रहेंगे।
सरकार पर बढ़ा भारी दबाव, जनआक्रोश के सामने झुका प्रशासनिक तंत्र
NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद से ही देशभर में असंतोष का माहौल था। जंतर-मंतर पर CJP और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा दिए जा रहे धरने ने सरकार पर व्यापक प्रशासनिक व राजनीतिक दबाव बनाया। यद्यपि प्रारंभिक स्तर पर शीर्ष नेतृत्व मंत्री का बचाव करता दिख रहा था, परंतु बढ़ते जनाक्रोश, निरंतर विरोध और अभ्यर्थियों की एकजुटता के चलते अंततः शिक्षा मंत्री को अपने पद से त्यागपत्र सौंपना पड़ा। इस घटनाक्रम को भारतीय छात्र राजनीति में एक बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।