देवगढ़ में तालाबों को गंदे पानी से बचाने की तैयारी, 5 जगह लगेंगे STP प्लांट
देवगढ़: राजस्थान के देवगढ़ कस्बे में ऐतिहासिक तालाबों और प्रमुख जलस्रोतों को गंदे पानी के प्रदूषण से बचाने के लिए नगर पालिका ने योजना तैयार की है। इसके तहत कस्बे में पांच प्रमुख स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाए जाएंगे। इन प्लांटों के जरिए नालियों के गंदे पानी को तालाबों में पहुंचने से पहले साफ किया जाएगा। योजना के तहत कुंडेली बांध, ऐतिहासिक राघव सागर और संग्राम सागर को प्रदूषण से बचाने की तैयारी है। गुरुवार को जयपुर से आई विशेषज्ञों की टीम ने नगर पालिका अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कस्बे का सर्वे किया।
पांच स्थानों पर लगाए जाएंगे STP प्लांट
देवगढ़ के ऐतिहासिक तालाबों और जलस्रोतों में गंदे पानी की निकासी रोकने के लिए नगर पालिका पांच स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके लिए जयपुर से आई विशेषज्ञों की टीम ने गुरुवार को कस्बे का दौरा किया।टीम ने नगर पालिका अधिशासी अधिकारी पीएल जाट, पार्षद दीनदयाल त्रिवेदी, पूर्व पार्षद हंसराज कंसारा, वासुदेव पानेरी और पालिका कर्मचारियों के साथ संभावित स्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान पानी के बहाव, भौगोलिक स्थिति और जमीन की ढलान का आकलन किया गया। सर्वे के आधार पर पांच स्थान चिह्नित किए गए हैं।
कुंडेली बांध, राघव सागर और संग्राम सागर को मिलेगी राहत
कस्बे के नालों से निकलने वाला गंदा पानी अब तक कुंडेली बांध, ऐतिहासिक राघव सागर और बस स्टैंड के पास स्थित संग्राम सागर तक पहुंचने की समस्या पैदा कर रहा था। इससे जलस्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका बनी हुई है।प्रस्तावित STP प्लांटों के जरिए गंदे पानी को तालाबों में पहुंचने से पहले ट्रीट किया जाएगा। इससे इन जलस्रोतों में प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर राघव सागर और संग्राम सागर के आसपास रहने वाले लोगों को बदबू और गंदे पानी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
शुद्ध किए गए पानी का होगा दोबारा उपयोग
नगर पालिका अधिशासी अधिकारी पीएल जाट के अनुसार, STP में नालियों से आने वाले गंदे पानी को ट्रीट करके उपयोग योग्य बनाया जाएगा। इसके बाद इस पानी का इस्तेमाल पार्कों में बागवानी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्यों के लिए किया जा सकेगा।इस व्यवस्था से पानी की बर्बादी कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, साफ किए गए पानी का दोबारा उपयोग होने से प्राकृतिक जलस्रोतों पर दबाव घटाने की संभावना है। भूजल संरक्षण के लिहाज से भी यह पहल उपयोगी हो सकती है।
पानी के बहाव और ढलान के आधार पर तय होंगे स्थान
STP प्लांट लगाने के लिए स्थानों का चयन करते समय विशेषज्ञों ने कस्बे की भौगोलिक स्थिति और नालियों से आने वाले पानी के बहाव का निरीक्षण किया। जमीन की ढलान को भी ध्यान में रखा गया, ताकि गंदे पानी को प्लांट तक पहुंचाने और ट्रीटमेंट के बाद उसके उपयोग की व्यवस्था बनाई जा सके।नगर पालिका और विशेषज्ञ टीम के बीच इस संबंध में चर्चा हुई। हालांकि, पांचों प्लांटों की क्षमता, निर्माण लागत और काम शुरू होने की समयसीमा की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
ऐतिहासिक तालाबों को प्रदूषण से बचाने की पहल
देवगढ़ के ऐतिहासिक तालाब कस्बे की जल व्यवस्था और पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय से नालियों का पानी इन जलस्रोतों तक पहुंचने की समस्या बनी हुई थी। इससे आसपास के लोगों को भी परेशानी होती थी।पांच स्थानों पर STP लगाने की योजना पूरी होने के बाद गंदे पानी को सीधे तालाबों में जाने से रोकने में मदद मिल सकती है। अब इस योजना के अगले चरण, निर्माण की शुरुआत और प्लांटों के संचालन पर नजर रहेगी।
नगर पालिका की योजना से जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
देवगढ़ में प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट योजना का उद्देश्य केवल गंदे पानी को साफ करना नहीं, बल्कि उसका उपयोग भी सुनिश्चित करना है। यदि योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो तालाबों को प्रदूषण से बचाने के साथ बागवानी और कृषि के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।फिलहाल विशेषज्ञों के सर्वे के बाद पांच संभावित स्थान चिह्नित किए गए हैं। अब परियोजना की लागत, क्षमता और निर्माण संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।