बांसवाड़ा में 4 प्रसूताओं की मौत से बढ़ा विवाद, अशोक गहलोत ने सरकार से मांगा जवाब
राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित महात्मा गांधी चिकित्सालय में चार दिनों के भीतर चार प्रसूताओं की मौत के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार पर सवाल उठाते हुए मातृ मृत्यु के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भी मौके पर पहुंच गई है। मौतों के वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया मंच X पर प्रदेश में बढ़ रही प्रसूताओं की मौतों को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने लिखा कि कोटा, जोधपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा के बाद अब बांसवाड़ा में भी लगातार मातृ मृत्यु के मामले सामने आए हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। गहलोत ने केंद्र सरकार से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की विशेषज्ञ टीम राजस्थान भेजने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की।
बांसवाड़ा अस्पताल में जांच तेज, विशेषज्ञ टीम पहुंची
चार प्रसूताओं की मौत के बाद जयपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम बांसवाड़ा पहुंची। अस्पताल में सीएमएचओ, पीएमओ और स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ बैठक कर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की गई। जिला प्रशासन ने भी मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौतों के कारणों और किसी संभावित लापरवाही पर स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।
चार दिनों में चार मौतें, अलग-अलग कारणों की आशंका
जानकारी के अनुसार पहली प्रसूता की मौत 7 जुलाई, दूसरी की 8 जुलाई और दो अन्य महिलाओं की 10 जुलाई को हुई। मृतकों में एक नाबालिग भी शामिल थी, जिसे कथित तौर पर गर्भपात के प्रयास के बाद अस्पताल लाया गया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रारंभिक स्तर पर कुछ मामलों में गंभीर एनीमिया और एक मामले में उच्च रक्तचाप को संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि इन कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि परिजनों की सहमति के बाद शव सौंप दिए गए।
मामले को लेकर उठे कई अहम सवाल
घटना के बाद कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आए हैं। इनमें पहली मौत के बाद तत्काल जांच समिति गठित नहीं होने, संबंधित चिकित्सकों और स्टाफ से समय रहते पूछताछ नहीं होने, प्रसव पूर्व जांच प्रक्रिया की समीक्षा तथा पोस्टमार्टम नहीं कराए जाने जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन प्रश्नों के उत्तर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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