कोटा में भाजपा कार्यालय की जमीन पर विवाद, रेलवे ने जताया स्वामित्व का दावा, सियासत भी गरमाई
राजस्थान के कोटा में निर्माणाधीन भाजपा जिला कार्यालय की जमीन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम मध्य रेलवे ने दावा किया है कि जिस भूखंड पर कार्यालय का निर्माण हो रहा है, वह रेलवे की भूमि है और इसे केवल सड़क निर्माण के लिए लीज पर दिया गया था। दूसरी ओर भाजपा और राज्य सरकार का कहना है कि संबंधित जमीन का आवंटन केडीए के रिकॉर्ड के अनुसार वैध है। मामले ने अब प्रशासनिक विवाद के साथ राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
रेलवे ने निर्माण पर जताई आपत्ति
पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि संबंधित भूमि वर्ष 2008 में तत्कालीन नगर विकास प्राधिकरण (यूआईटी) को 35 वर्ष की लीज पर केवल सड़क निर्माण के उद्देश्य से दी गई थी। रेलवे का कहना है कि लीज की शर्तों के तहत इस भूमि का किसी अन्य कार्य के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता, जबकि वर्तमान में वहां भाजपा के जिला कार्यालय का निर्माण किया जा रहा है। रेलवे ने केडीए से निर्माण रोकने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
रिकॉर्ड में अंतर से बढ़ा विवाद
रेलवे का दावा है कि वर्ष 1965 के उसके भूमि रिकॉर्ड के अनुसार यह भूखंड रेलवे की संपत्ति है। वहीं संयुक्त सर्वे के दौरान राजस्व विभाग के 1982 के रिकॉर्ड में भूमि की अलग माप सामने आने से विवाद और जटिल हो गया है। अलग-अलग विभागों के दस्तावेजों में अंतर होने के कारण अब भूमि स्वामित्व को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
आवंटन का इतिहास बना राजनीतिक मुद्दा
इस भूमि का आवंटन वर्ष 2016 में तत्कालीन भाजपा सरकार के दौरान भाजपा को किया गया था। बाद में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रेलवे की आपत्तियों का हवाला देते हुए वर्ष 2020 में यह आवंटन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 2025 में भाजपा सरकार बनने पर विधानसभा में मामला उठने के बाद यूडीएच विभाग ने दोबारा आवंटन बहाल कर दिया, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ। यही घटनाक्रम अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
सरकार और भाजपा ने आवंटन को बताया वैध
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि केडीए के मौजूदा रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भूमि केडीए के अधिकार क्षेत्र में है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। भाजपा का कहना है कि पार्टी ने नियमानुसार पूरी राशि जमा कर भूमि का आवंटन प्राप्त किया है। पार्टी नेताओं के अनुसार यदि कोई विवाद है तो वह रेलवे और केडीए के बीच प्रशासनिक स्तर का विषय है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल, रेलवे ने कार्रवाई के दिए संकेत
पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने रेलवे की आपत्ति और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आवंटन निरस्त किया था, इसलिए दोबारा आवंटन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं रेलवे अधिकारियों ने कहा कि उनके पास लीज एग्रीमेंट और स्वामित्व से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध हैं। यदि आवश्यक हुआ तो रेलवे कानूनी कार्रवाई करेगा और पहले केडीए के साथ बैठक कर पूरे मामले को स्पष्ट करने का प्रयास करेगा। फिलहाल यह विवाद प्रशासनिक जांच और संभावित कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार कर रहा है।
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