चीन की चार कंपनियों को केंद्र सरकार से राहत, बिजली परियोजनाओं के लिए दो साल की विशेष छूट
केंद्र सरकार ने बिजली क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के उद्देश्य से चार चीनी कंपनियों को सरकारी खरीद नियमों में सीमित अवधि की छूट देने का फैसला किया है। गलवान घाटी की घटना के बाद लागू किए गए प्रतिबंधों के बावजूद यह राहत दो वर्षों के लिए दी गई है। सरकार का कहना है कि इस कदम से बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं में देरी कम होगी और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। वहीं, विपक्ष ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार की नीति पर निशाना साधा है।
बिजली परियोजनाओं को गति देने के लिए लिया गया फैसला
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक खरीद (पब्लिक प्रोक्योरमेंट) से जुड़े नियमों के तहत चार चीनी कंपनियों को दो वर्ष की विशेष छूट प्रदान की है। इस निर्णय के बाद ये कंपनियां सरकारी टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकेंगी। सरकार का तर्क है कि कई अहम ट्रांसमिशन और बिजली परियोजनाएं आवश्यक उपकरणों की कमी और सीमित आपूर्ति के कारण प्रभावित हो रही थीं। ऐसे में समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने और ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
किन कंपनियों को मिली राहत
सरकार की ओर से जिन कंपनियों को छूट दी गई है, उनमें टीबीईए एनर्जी इंडिया, नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया, न्यू नॉर्थईस्ट इलेक्ट्रिक इंडिया और ताइकाई इलेक्ट्रिक (इंडिया) शामिल हैं। ये सभी कंपनियां चीन की मूल कंपनियों से जुड़ी हैं या उनके साथ तकनीकी सहयोग रखती हैं। अब निर्धारित शर्तों के तहत ये कंपनियां सरकारी बिजली परियोजनाओं के लिए निविदाओं में हिस्सा ले सकेंगी। सरकार का मानना है कि इन कंपनियों की भागीदारी से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति में सुधार होगा।
गलवान के बाद बने नियमों में मिली सीमित राहत
साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई सैन्य झड़प के बाद केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों के लिए सरकारी खरीद प्रक्रिया में राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी को अनिवार्य बना दिया था। अब बिजली क्षेत्र की विशेष जरूरतों को देखते हुए इन नियमों में सीमित और समयबद्ध छूट दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में निर्धारित सीमा तक चीनी निवेश वाली कंपनियों को स्वचालित मार्ग के तहत राहत भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि आवश्यक बिजली उपकरणों की खरीद में बाधा न आए।
ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति पर होगा असर
सरकार का मानना है कि इस फैसले से हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर, गैस इंसुलेटेड स्विचगियर और अन्य महत्वपूर्ण बिजली उपकरणों की उपलब्धता बेहतर होगी। वर्तमान में इन उपकरणों के घरेलू उत्पादन की क्षमता सीमित बताई जाती है, जिसके कारण कई परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त आपूर्तिकर्ताओं के शामिल होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है और ट्रांसमिशन व नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को गति मिलेगी।
कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल
सरकार के इस निर्णय पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार चीन के प्रति नरम रुख अपना रही है, जिससे घरेलू उद्योगों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने भारत-चीन व्यापार घाटे और सीमा से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाए। हालांकि सरकार की ओर से इस फैसले को पूरी तरह परियोजनाओं की जरूरत और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा प्रशासनिक निर्णय बताया गया है।