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चीन की पकड़ कमजोर करने की तैयारी, भारत को मिला ब्राजील जैसा नया रणनीतिक साझेदार

दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भारत को बड़ी राहत मिल सकती है। दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा देश ब्राजील विशाल रेयर अर्थ और बैटरी खनिज भंडार के कारण भारत के लिए एक अहम रणनीतिक साझेदार बनकर उभर रहा है। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं।

दुनिया के एक चौथाई रेयर अर्थ भंडार का मालिक है ब्राजील

ब्राजील के पास लगभग 21 मिलियन टन रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार होने का अनुमान है, जो वैश्विक भंडार का करीब 25 प्रतिशत माना जाता है। चीन के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा भंडार है। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में किया जाता है। ऐसे में ब्राजील भारत के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है, जिससे चीन पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।

भारत-ब्राजील ने बढ़ाया रणनीतिक सहयोग

फरवरी में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। भारत लंबे समय से वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने की कोशिश कर रहा है और ब्राजील इस रणनीति का अहम हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। दोनों देश खनन, प्रोसेसिंग और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

ग्रेफाइट, लिथियम और निकल का भी बड़ा केंद्र है ब्राजील

रेयर अर्थ के अलावा ब्राजील के पास दुनिया का लगभग 26 प्रतिशत ग्रेफाइट भंडार मौजूद है। इसके साथ ही निकल, तांबा और लिथियम जैसे खनिजों की भी प्रचुर उपलब्धता है। मिनास गेरैस क्षेत्र की ‘लिथियम वैली’ तेजी से वैश्विक बैटरी उद्योग का प्रमुख केंद्र बन रही है। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग और ऊर्जा भंडारण तकनीक के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

नियोबियम उत्पादन में ब्राजील की वैश्विक पकड़

ब्राजील नियोबियम उत्पादन में लगभग एकाधिकार रखता है। इस धातु का इस्तेमाल मजबूत स्टील और विशेष मिश्र धातुएं बनाने में किया जाता है, जिनका उपयोग रक्षा, विमानन और भारी उद्योगों में होता है। इसी वजह से दुनिया की कई बड़ी कंपनियां ब्राजील में निवेश के अवसर तलाश रही हैं और भारत भी इस दिशा में सक्रियता बढ़ा रहा है।

दक्षिण अमेरिका में बढ़ा रहा है भारत अपना दायरा

ब्राजील के अलावा भारत चिली, अर्जेंटीना, पेरू और वेनेजुएला जैसे देशों के साथ भी महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को लेकर संभावनाएं तलाश रहा है। चिली के पास दुनिया का 30 प्रतिशत लिथियम और 20 प्रतिशत से अधिक तांबा भंडार मौजूद है। भारतीय कंपनियां ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड माइनिंग परियोजनाओं के जरिए इन संसाधनों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही हैं।

चीन की 90% प्रोसेसिंग क्षमता के बीच भारत की नई रणनीति

वर्तमान में दुनिया की लगभग 90 प्रतिशत रेयर अर्थ प्रोसेसिंग क्षमता चीन के पास है। ऐसे में भारत वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करने पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राजील और अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ मजबूत साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा, सेमीकंडक्टर उद्योग और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन को नई मजबूती दे सकती है।

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