#हेल्थ न्यूज़

ब्रेन स्ट्रोक के 3 प्रकार: इस्केमिक, हेमोरेजिक और मिनी स्ट्रोक में क्या है अंतर?

ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें समय पर इलाज न मिलने पर दिमाग को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक केवल एक प्रकार का नहीं होता, बल्कि इसके तीन प्रमुख प्रकार हैं—इस्केमिक स्ट्रोक, हेमोरेजिक स्ट्रोक और ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) यानी मिनी स्ट्रोक। इनके कारण, लक्षण और गंभीरता अलग-अलग हो सकती है।

इस्केमिक स्ट्रोक सबसे ज्यादा मामलों में पाया जाता है

ब्रेन स्ट्रोक के लगभग 85 प्रतिशत मामले इस्केमिक स्ट्रोक के होते हैं। यह तब होता है जब दिमाग तक खून पहुंचाने वाली किसी धमनी में खून का थक्का या वसा जमने से रुकावट आ जाती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और हृदय रोग इसके प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं।

हेमोरेजिक स्ट्रोक में फट जाती है रक्त वाहिका

हेमोरेजिक स्ट्रोक अपेक्षाकृत कम मामलों में होता है, लेकिन इसे अधिक गंभीर माना जाता है। इसमें मस्तिष्क के भीतर या उसके आसपास की रक्त वाहिका फट जाती है, जिससे अंदरूनी रक्तस्राव शुरू हो जाता है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर, एन्यूरिज्म, सिर की गंभीर चोट या रक्त संबंधी विकार इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। इस स्थिति में अचानक तेज सिरदर्द, उल्टी, बेहोशी या दौरे पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

मिनी स्ट्रोक भविष्य के बड़े खतरे का संकेत

ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) को मिनी स्ट्रोक कहा जाता है। इसमें दिमाग तक खून का प्रवाह कुछ समय के लिए रुकता है, लेकिन थोड़ी देर बाद सामान्य हो जाता है। इसके लक्षण कुछ मिनटों या घंटों में खत्म हो सकते हैं, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मिनी स्ट्रोक भविष्य में आने वाले गंभीर स्ट्रोक की चेतावनी भी हो सकता है।

तीनों स्ट्रोक में क्या है अंतर?

इस्केमिक स्ट्रोक में रक्त वाहिका ब्लॉक हो जाती है, हेमोरेजिक स्ट्रोक में रक्त वाहिका फट जाती है, जबकि मिनी स्ट्रोक में रुकावट अस्थायी होती है और लक्षण कुछ समय बाद खत्म हो जाते हैं। हालांकि तीनों स्थितियों में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी होता है।

FAST फॉर्मूला से पचानें स्ट्रोक के लक्षण

  • Face: चेहरा एक तरफ झुकना या टेढ़ा होना
  • Arm: एक हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होना
  • Speech: बोलने या समझने में परेशानी होना
  • Time: ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचना

स्ट्रोक के इलाज में हर मिनट की अहमियत होती है। समय पर उपचार मिलने से मरीज के ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com
ब्रेन स्ट्रोक के 3 प्रकार: इस्केमिक, हेमोरेजिक और मिनी स्ट्रोक में क्या है अंतर?

Post Office NSC: 7.7% ब्याज के साथ

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *