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जीरो टॉलरेंस नीति पर भजनलाल सरकार का बड़ा एक्शन, कृषि विभाग के तीन अधिकारी निलंबित

राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कृषि विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई। सरकार का कहना है कि किसानों और आम जनता से जुड़े विभागों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनुचित व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं इस कार्रवाई के बाद प्रदेश की सियासत भी गर्मा गई है और विपक्ष ने सरकार तथा कृषि मंत्री को निशाने पर लिया है।

तीन कृषि अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई

कृषि विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार कृषि पर्यवेक्षक संदीप कुमार, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक रजनीश कुमार और सहायक कृषि अधिकारी विशाल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। विभाग का कहना है कि इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्ट आचरण, राजकीय कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और अन्य आरोपों की जांच चल रही थी। प्रारंभिक जांच में आरोपों के आधार मिलने के बाद विभाग ने सेवा नियमों के तहत निलंबन का निर्णय लिया।

CCA नियमों के तहत जारी हुआ निलंबन आदेश

कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि कार्रवाई राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के प्रावधानों के तहत की गई है। विभागीय जांच पूरी होने तक तीनों अधिकारियों को निलंबित रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने निर्धारित मुख्यालय पर उपस्थित रहेंगे और सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

जांच प्रभावित न हो, इसलिए बदले गए मुख्यालय

विभाग ने जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए तीनों अधिकारियों के मुख्यालय भी बदल दिए हैं। संदीप कुमार को धौलपुर, रजनीश कुमार को बाड़मेर और विशाल कुमार को बारां स्थित संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) कार्यालय से संबद्ध किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी और विभागीय कार्रवाई पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ सकेगी।

विपक्ष ने सरकार और मंत्री पर उठाए सवाल

इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने सरकार और कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि जिन अधिकारियों के खिलाफ पहले शिकायतें सामने आई थीं, अब उन्हीं पर विभागीय कार्रवाई हुई है। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, कथित आर्थिक लेन-देन और संबंधित मामलों की गहराई से पड़ताल की मांग की है। साथ ही सरकार से पूरे प्रकरण में पारदर्शिता बरतने की अपील भी की गई है।

सरकार ने दोहराई भ्रष्टाचार पर सख्ती की नीति

सरकार का कहना है कि किसानों और आम नागरिकों से जुड़े विभागों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों से लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर विभागीय जांच कराई गई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में अन्य मामलों में भी दोष सामने आते हैं तो नियमानुसार आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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