अफगानिस्तान-पाकिस्तान ट्रांजिट व्यापार में बड़ी गिरावट, ईरान के चाबहार पोर्ट की ओर बढ़ा झुकाव
ट्रांजिट व्यापार में लगातार आई गिरावट
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026 में अफगानिस्तान-पाकिस्तान ट्रांजिट व्यापार घटकर लगभग 36.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक दोनों देशों के बीच यह कारोबार कई अरब डॉलर के स्तर पर था। कंटेनरों की आवाजाही में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जिससे सीमा पार व्यापार पर असर पड़ा है।
चाबहार पोर्ट बना अहम विकल्प
विश्लेषकों के अनुसार, अफगानिस्तान ने हाल के वर्षों में ईरान के चाबहार पोर्ट के उपयोग पर अधिक जोर दिया है। चाबहार बंदरगाह भारत के सहयोग से विकसित किया गया है और इसे अफगानिस्तान तथा मध्य एशिया तक पहुंच के एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा जाता है। इससे अफगानिस्तान को पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर निर्भरता कम करने का अवसर मिला है।
सीमा विवाद और सुरक्षा हालात का भी पड़ा असर
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव और समय-समय पर सीमा बंद होने जैसी घटनाओं ने भी ट्रांजिट व्यापार को प्रभावित किया। हालांकि व्यापार में गिरावट की शुरुआत सीमा बंद होने से पहले ही हो चुकी थी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि काबुल लंबे समय से अपने आयात-निर्यात मार्गों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रहा था।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है चाबहार?
चाबहार पोर्ट भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस परियोजना के माध्यम से भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। यह मार्ग पाकिस्तान से होकर गुजरने वाले पारंपरिक रास्ते का एक वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध कराता है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा मिलने की संभावना बढ़ी है।
आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी
अफगानिस्तान-पाकिस्तान व्यापार से जुड़े अधिकांश आंकड़े पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों और व्यापार विश्लेषकों के हवाले से सामने आए हैं। इन दावों पर दोनों देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है। ऐसे में व्यापार में आई गिरावट और उसके कारणों का आकलन आधिकारिक आंकड़ों और स्वतंत्र स्रोतों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।