Rajasthan Dead Body Protest Law 2025: राजस्थान में पहली बार ‘मृत शरीर सम्मान अधिनियम’, सड़क पर शव रखकर विरोध अब होगा गैरकानूनी
देशभर में बढ़ते उस चलन पर अब नकेल कसने की शुरुआत हो गई है, जिसमें हत्या या दुर्घटना के बाद लोग मृतक के शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन करने लगते थे। कभी मुआवज़े की मांग, कभी लापरवाही के आरोप—और तब तक अंतिम संस्कार रोक देना, जब तक प्रशासन अपनी शर्तें न मान ले। अब राजस्थान सरकार ने इस प्रवृत्ति को खत्म करने के लिए एक सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश में ‘मृत शरीर सम्मान अधिनियम, 2023’ आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। यह कानून न सिर्फ शव के सम्मान की रक्षा करेगा बल्कि सड़क जाम, तनाव और राजनीतिकरण जैसी समस्याओं पर भी रोक लगाएगा। इस कानून का नाम अब ‘राजस्थान डेड बॉडी प्रोटेस्ट लॉ 2025’ रखा गया है।
राजस्थान में लागू हुआ ‘मृत शरीर सम्मान अधिनियम, 2023’
यह कानून ‘राजस्थान डेड बॉडी प्रोटेस्ट लॉ 2025’ के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगा।
राजस्थान डेड बॉडी प्रोटेस्ट लॉ 2025 के तहत कानून का पालन न करने पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है।
राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जिसने शवों के गलत इस्तेमाल और सड़क पर विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए विशेष कानून लागू किया है। हालिया घटनाओं को देखते हुए सरकार ने इस अधिनियम की अधिसूचना जारी की है, जिसके बाद अब किसी भी तरह का ‘शव आधारित विरोध’ कानूनन अपराध माना जाएगा।
सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन अब बनेगा दंडनीय अपराध
बीते कुछ सालों में कई जिलों में यह चलन तेज़ी से बढ़ा कि लोग सड़क पर मृत शरीर रखकर हजारों की भीड़ जुटा लेते थे। इससे न सिर्फ कानून व्यवस्था प्रभावित होती थी, बल्कि एंबुलेंस, स्कूल बसों और आम जनता का आवागमन भी घंटों बाधित रहता था। अब नए कानून के तहत ऐसे किसी भी प्रदर्शन को कठोर दंड के दायरे में रखा गया है।
गैर-परिजन द्वारा शव का उपयोग करने पर लगेगी 6 महीने से 5 साल तक जेल
अगर कोई व्यक्ति—जो मृतक परिवार का सदस्य नहीं है—शव को विरोध का माध्यम बनाता है, तो उसे 6 महीने से लेकर 5 साल तक की कैद का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि राजनीतिक या बाहरी तत्व अक्सर इस तरह की परिस्थितियों को भड़काते थे।
परिवार के सदस्य भी दोषी पाए गए तो होगी सख्त कार्रवाई
कानून सिर्फ बाहरी लोगों तक सीमित नहीं है। अगर मृतक का परिवार स्वयं शव को सड़क पर रखकर विरोध करता है या किसी बाहरी व्यक्ति को ऐसा करने की अनुमति देता है, तो उन पर भी कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में अधिकतम 2 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
सरकार का उद्देश्य:
‘शव का सम्मान’ और ‘सड़क पर शांति’
राजस्थान सरकार ने स्पष्ट कहा है कि यह अधिनियम किसी की मांग दबाने या विरोध का अधिकार छीनने के लिए नहीं है, बल्कि मृतक के सम्मान तथा सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए है। किसी भी समस्या, मुआवज़े या जांच की मांग को कानूनी रास्तों से उठाने की सलाह देते हुए सरकार ने सड़क जाम और राजनीतिकरण को रोकने का इरादा दिखाया है।
कानून व्यवस्था सुधार की दिशा में बड़ा कदम
‘मृत शरीर सम्मान अधिनियम, 2023’ का लागू होना सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन की प्रवृत्ति पर बड़ी रोक साबित हो सकता है। इस कानून से न सिर्फ सार्वजनिक जीवन में सुधार होगा, बल्कि मृतकों के सम्मान का भी संरक्षण होगा। राजस्थान ने एक बार फिर देश भर के सामने एक मिसाल पेश की है।