रोहित गोदारा गैंग केस में रिश्वत का खेल, सरकारी वकील 50 हजार लेते गिरफ्तार
इंट्रो: सीकर ACB ने जयपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नीमकाथाना कोर्ट में कार्यरत सहायक निदेशक अभियोजन कौशल सिंह राठौड़ को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने संगठित गिरोह से जुड़े मामले में आरोपी के पक्ष में केस कमजोर करने और गंभीर धाराएं हटाने के बदले 3.25 लाख रुपये की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के बाद सौदा 3 लाख रुपये में तय हुआ और पहली किस्त लेते ही ACB ने आरोपी अधिकारी को दबोच लिया।
3.25 लाख की रिश्वत की थी मांग
ACB के अनुसार, शिकायतकर्ता का बेटा संगठित गिरोह से जुड़े एक मामले में नीमकाथाना जेल में बंद है। आरोप है कि सहायक निदेशक अभियोजन कौशल सिंह राठौड़ ने मामले में आरोपी को राहत दिलाने के लिए 3.25 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। इसके बदले कोर्ट में चल रहे प्रकरण से धारा 111(4) और 308 हटाने, अभियोजन पक्ष को कमजोर करने और आरोपी के वकील के खिलाफ प्रभावी पैरवी नहीं करने की बात कही गई थी। शिकायत मिलने के बाद ACB ने मामले का सत्यापन कराया।
3 लाख रुपये में तय हुआ रिश्वत का सौदा
शिकायत के सत्यापन के दौरान आरोपी अधिकारी और परिवादी के बीच रिश्वत की रकम को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद कथित तौर पर 3 लाख रुपये में सौदा तय किया गया। पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये देना तय हुआ। ACB ने शिकायत को सही पाए जाने के बाद ट्रैप की योजना बनाई। टीम ने आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए पूरी कार्रवाई को गोपनीय रखा और तय स्थान पर निगरानी शुरू कर दी।
जयपुर रेलवे स्टेशन के पास ACB का ट्रैप
ACB की सीकर यूनिट ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय कुमार के नेतृत्व में जाल बिछाया। जैसे ही कौशल सिंह राठौड़ 50 हजार रुपये की पहली किस्त लेने के लिए जयपुर रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे, ACB टीम ने उन्हें पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान रिश्वत की रकम बरामद की गई। अधिकारी को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामले में रिश्वत की पूरी रकम और आरोपी अधिकारी की भूमिका से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
रोहित गोदारा गैंग से जुड़े केस में मांगी रिश्वत
ACB की शुरुआती जांच के अनुसार, जिस मामले में केस कमजोर करने के लिए रिश्वत मांगे जाने का आरोप है, वह संगठित अपराध से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का बेटा इस प्रकरण में जेल में बंद है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी युवक के कथित तौर पर कुख्यात गैंगस्टर रोहित गोदारा के नेटवर्क से जुड़े लोगों से संपर्क होने की बात सामने आई थी। पुलिस इसी संगठित अपराध से जुड़े मामले की जांच कर रही थी।
धाराएं हटाने और पैरवी कमजोर करने का आरोप
ACB के मुताबिक, रिश्वत के बदले आरोपी अधिकारी से केस में गंभीर धाराओं को हटाने और अभियोजन की पैरवी कमजोर करने की मांग से जुड़ा आरोप है। इनमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(4) और 308 का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। ACB अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत के इस कथित लेनदेन में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
ACB की निगरानी में आगे की जांच
कार्रवाई ACB की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव और महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरविजन में की गई। अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद अब पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। ACB रिश्वत मांगने की वजह, मामले से जुड़े दस्तावेजों और कथित तौर पर केस को प्रभावित करने की कोशिश के पहलुओं की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि आरोपी अधिकारी ने इससे पहले किसी अन्य मामले में भी इसी तरह की मांग तो नहीं की थी।