Solar Project: जयपुर में बिजली बचत का बड़ा प्लान, 5 मेगावाट सोलर से JDA को हर साल 6 करोड़ की बचत
जयपुर में द्रव्यवती नदी से जुड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और गार्डन अब सौर ऊर्जा का उत्पादन भी करेंगे। जयपुर विकास प्राधिकरण ने नदी क्षेत्र के 6 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और 2 गार्डन की छतों पर कुल 5 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट लगाने की योजना तैयार की है। परियोजना से रोजाना औसतन 20 हजार यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। इससे सालाना करीब 72 लाख यूनिट बिजली पैदा हो सकती है। JDA के अनुमान के मुताबिक, इससे हर साल करीब 6.12 करोड़ रुपए की बिजली बचत होगी। परियोजना से 25 वर्षों में करीब 1.31 लाख टन CO₂ उत्सर्जन कम करने का लक्ष्य है।
6 STP और 2 गार्डन की छतों पर लगेंगे सोलर प्लांट
JDA ने द्रव्यवती नदी से जुड़े बड़े बिजली उपभोक्ता परिसरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की योजना बनाई है। इसके तहत 6 STP और 2 गार्डन की छतों का इस्तेमाल किया जाएगा।इन परिसरों में सोलर पैनल लगाए जाएंगे। यहां बनने वाली बिजली का इस्तेमाल संबंधित STP और गार्डन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा।JDA का उद्देश्य पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करना और बिजली खर्च को नियंत्रित करना है।
5 मेगावाट क्षमता से रोजाना 20 हजार यूनिट बिजली
प्रस्तावित परियोजना की कुल क्षमता 5 मेगावाट होगी। इससे रोजाना औसतन करीब 20 हजार यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान हैइस हिसाब से एक महीने में करीब 6 लाख यूनिट और सालभर में लगभग 72 लाख यूनिट बिजली पैदा हो सकती है।उत्पादन के इस अनुमान के आधार पर JDA को अपने बिजली खर्च में बड़ी बचत होने की उम्मीद है।
हर साल 6.12 करोड़ रुपए की संभावित बचत
परियोजना के लिए बिजली की औसत दर करीब 8.50 रुपए प्रति यूनिट मानी गई है। 72 लाख यूनिट सालाना उत्पादन के आधार पर करीब 6.12 करोड़ रुपए की वार्षिक बिजली बचत का अनुमान है।11 साल की भुगतान अवधि में सकल बचत करीब 67.32 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है।यानी सौर ऊर्जा परियोजना से JDA को लंबे समय में बिजली खर्च कम करने का आर्थिक लाभ मिल सकता है।
11 साल में भुगतान, 31.94 करोड़ का अनुमानित शुद्ध लाभ
JDA इस परियोजना को राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी RRECL के माध्यम से संचालित कर रहा है।जानकारी के अनुसार 11 वर्षों तक RRECL को 536.12 रुपए प्रति किलोवाट प्रति माह की दर से भुगतान किया जाएगा। इस अवधि में करीब 35.38 करोड़ रुपए भुगतान का अनुमान है।इसके बाद अनुमानित सकल बचत में से भुगतान घटाने पर करीब 31.94 करोड़ रुपए का शुद्ध आर्थिक लाभ रहने की संभावना है।
25 साल तक होगा संचालन और रखरखाव
परियोजना की एक खास बात इसका लंबा संचालन काल है। अनुबंध के अनुसार सोलर प्लांट का संचालन और रखरखाव 25 वर्षों तक जारी रहेगा।यानी 11 साल की भुगतान अवधि समाप्त होने के बाद भी सोलर संयंत्र काम करते रहेंगे।इससे JDA को लंबे समय तक सौर ऊर्जा उत्पादन और बिजली बचत का लाभ मिलने की उम्मीद है।
25 साल में 1.31 लाख टन CO₂ उत्सर्जन घटाने का लक्ष्य
सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली उत्पादन में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। इससे कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आने का अनुमान है।परियोजना के अनुसार हर साल करीब 5,227 टन CO₂ उत्सर्जन कम हो सकता है।25 वर्षों में यह आंकड़ा करीब 1.31 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। इस लिहाज से परियोजना को आर्थिक बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ा जा रहा है।
द्रव्यवती नदी के STP की बिजली जरूरत होगी कम
द्रव्यवती नदी से जुड़े STP लगातार बिजली की जरूरत वाले बड़े परिसरों में शामिल हैं। सोलर प्लांट लगने के बाद इनकी ऊर्जा जरूरत का बड़ा हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा।इससे JDA के नियमित विद्युत खर्च में कमी आने की संभावना है। साथ ही बिजली की बढ़ती लागत का असर भी कुछ हद तक कम किया जा सकता है।
ग्रीन एनर्जी की दिशा में JDA की पहल
JDA की यह परियोजना जयपुर में सरकारी और सार्वजनिक परिसरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।द्रव्यवती नदी के STP और गार्डन जैसे परिसरों में सौर ऊर्जा का इस्तेमाल होने से बिजली बचत के साथ ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा।अब निगाह इस बात पर रहेगी कि परियोजना कब पूरी तरह स्थापित होती है और वास्तविक बिजली उत्पादन व बचत का आंकड़ा अनुमान के कितना करीब रहता है।